नीट पेपर लीक आंदोलन पर राजनीतिक प्रतिक्रिया और जनता का रुख
नीट परीक्षा पेपर लीक मामले के विरोध में चल रहे आंदोलन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मे ने कहा कि कांग्रेस को छात्रों के समर्थन में जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन में भाग लेना चाहिए था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस का प्रदर्शन गंभीरता की कमी दर्शाता है।
राजनीतिक दलों की भागीदारी और आंदोलन की सच्चाई
इंडिया टुडे के साथ एक विशेष बातचीत में आंग्मे ने कहा कि अब राजनेता वांगचुक और उनकी प्रतिष्ठा का लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जनता अब इन बातों को समझ चुकी है। उन्होंने कहा कि जनता को अब और धोखा नहीं दिया जा सकता। वांगचुक को पिछले हफ्ते जंतर-मंतर से हटा दिया गया था, लेकिन वे अपनी भूख हड़ताल अस्पताल से ही जारी रखे हुए हैं, जो अब 26वें दिन में प्रवेश कर चुकी है।
आंग्मे ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए प्रदर्शन में गंभीरता का अभाव था। उन्होंने कहा, “अब जनता को और बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता। यह जागरूक भारत है, जो ईमानदार नेताओं को ही समर्थन देगा।” यह बयान तब आया है जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने संसद मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई के विरोध में प्रधानमंत्री मोदी के आवास के पास धरना दिया।
आंदोलन का उद्देश्य और राजनीतिक स्वतंत्रता
रविवार को वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने के लिए अपनी मुख्य मांगों की सूची जारी की। उन्होंने सरकार से वादा मांगा कि 20 जुलाई को होने वाले मार्च में शामिल होने वाले किसी भी छात्र के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उनकी मुख्य मांग में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शामिल नहीं है, जिसे नरमी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
वांगचुक ने यह भी कहा कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने अस्पताल में उनसे मुलाकात के दौरान भरोसा दिलाया है कि प्रधान के इस्तीफे की मांग पर विचार किया जाएगा। इस आंदोलन का उद्देश्य राजनीतिक दलों से स्वतंत्र होकर शिक्षा को एक मुख्य मुद्दा बनाना है, जिसमें कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है।









