पंजाब में नशा मुक्ति के प्रयासों में तेजी, आंकड़ों में सुधार
पंजाब में नशा छोड़ने के लिए सरकारी उपचार का सहारा लेने वालों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। 2024 की तुलना में 2025 में नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिले में 164 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। यह बदलाव नशे के खिलाफ चल रही सरकार की मुहिम का ही परिणाम है, जिसने समाज में नशे की समस्या को लेकर जागरूकता और स्वीकृति दोनों को बढ़ावा दिया है।
युद्ध नशेआं विरुद्ध अभियान का प्रभाव और समाज में बदलाव
मार्च 2025 में शुरू हुई ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ नामक विशेष मुहिम ने पंजाब में नशे के प्रति समाज की धारणा में बड़ा बदलाव लाया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य नशे की पहचान करना ही नहीं, बल्कि नशे के शिकार लोगों का मनोबल बढ़ाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में पुनः शामिल करना है। इससे नशा मुक्ति को लेकर लोगों का डर और झिझक कम हुआ है, और अब इसे एक गंभीर बीमारी के रूप में देखा जा रहा है, जिसका समय पर इलाज संभव है।
रिकॉर्ड तोड़ रिहैब केंद्र और कानूनी सुरक्षा का विस्तार
रिहैबिलिटेशन (पुनर्वास) केंद्रों में भी इस बदलाव का असर दिख रहा है। 2024 में इन केंद्रों पर केवल 2,644 लोग ही पहुंच रहे थे, जो 2025 में बढ़कर 8,574 हो गए हैं, यानी लगभग 224 प्रतिशत की वृद्धि। जुलाई 2026 तक ही इन केंद्रों में 5,800 से अधिक लोग अपनी जिंदगी संवारने के लिए भर्ती हो चुके हैं।
इसी तरह ओपियोइड ट्रीटमेंट (OOAT) क्लीनिकों में भी नए रजिस्ट्रेशन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। 2024 में 13 हजार नए मरीज रजिस्टर हुए थे, जो 2025 में बढ़कर 17 हजार से पार कर गए हैं। अगस्त 2026 तक इन क्लीनिकों में 12,500 से अधिक नए मरीज इलाज का लाभ ले चुके हैं।
कानूनी सुरक्षा के क्षेत्र में भी सुधार हुआ है। एनडीपीएस (NDPS) कानून की धारा 64A के तहत अब तक 11 हजार से अधिक लोगों को कानूनी राहत मिल चुकी है। यह प्रावधान नशा छोड़ने के इच्छुक मरीजों को केस के डर से मुक्त कर सीधे अस्पताल पहुंचाने का मार्ग प्रदान करता है।
बलबीर सिंह का कहना है कि यह अभियान तीन मुख्य बातों पर केंद्रित है: तस्करों पर कड़ा कदम, पीड़ितों का सही उपचार और नई पीढ़ी को नशे से दूर रखना। परिवारों का बढ़ता भरोसा दर्शाता है कि पंजाब नशे के खिलाफ अपनी लड़ाई में मजबूती से खड़ा है।











