प्रवर्तन निदेशालय ने अनिलकुमार पवार की याचिका का विरोध किया
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने वसई विरार नगर निगम (VVCMC) के पूर्व प्रमुख और निलंबित IAS अधिकारी अनिलकुमार पवार की याचिका का कड़ा विरोध किया है। यह विरोध बॉम्बे हाई कोर्ट में शुक्रवार को दायर किया गया, जिसमें ED ने याचिका को ‘लागत सहित खारिज’ करने की मांग की है। पवार ने अपनी याचिका में 13 अगस्त 2025 को उनकी गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने और उन्हें तुरंत रिहा करने की अपील की थी।
याचिका में गिरफ्तारी को अवैध बताया गया
पवार की ओर से पेश वकीलों ने तर्क दिया कि उनकी गिरफ्तारी, ED का रिमांड आदेश और न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश सभी “गैर-मानसिक आधार” पर जारी किए गए हैं। उनका कहना था कि ये आदेश सामान्य प्रक्रिया के तहत नहीं बल्कि अनावश्यक और मनमाने तरीके से पारित किए गए हैं। साथ ही, उनका यह भी तर्क है कि जब अवैध निर्माण हुआ, तब वह VVCMC में नियुक्त नहीं थे, इसलिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
बड़े भ्रष्टाचार और रिश्वत के आरोप
अधिकारियों का आरोप है कि VVCMC के अधिकारियों, जूनियर इंजीनियरों, निजी आर्किटेक्टों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का एक भ्रष्ट गठजोड़ अवैध निर्माण के लिए रिश्वत इकट्ठा कर रहा था। यह गिरोह तुलींज पुलिस स्टेशन में दर्ज एक मामले से शुरू हुआ, जिसकी जांच बाद में ED ने संभाली।
डिजिटल सबूतों और अवैध धन का खुलासा
ED का दावा है कि तलाशी के दौरान जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच में पता चला है कि इस गिरोह के सदस्य आपस में फाइलवार और प्रोजेक्टवार रिश्वत की रकम की बातचीत कर रहे थे। इन फाइलों में अवैध आय को रियल एस्टेट और महंगी संपत्तियों में लगाने का भी खुलासा हुआ है।
अपराधी आय का रियल एस्टेट में निवेश
ED का आरोप है कि पवार ने अपनी अवैध आय का उपयोग रियल एस्टेट में किया। उन्होंने कथित तौर पर ₹3.375 करोड़ की नकदी अपने दूर के रिश्तेदार अमोल पाटिल के पास रखी, जिसका इस्तेमाल पाटिल ने अलीबाग में फार्महाउस और अन्य संपत्तियों की खरीदारी में किया। इसके अलावा, सोने-हीरे के आभूषण, नकद साड़ियां और मोती भी खरीदे गए थे।
फर्जी कंपनियों के माध्यम से धनशोधन
ED का दावा है कि पवार ने अपने परिवार की संस्थाओं के जरिए जटिल तरीके से धनशोधन किया। उन्होंने अपनी पत्नी, बेटियों और रिश्तेदारों के नाम पर फर्जी कंपनियां और फर्में बनाकर अवैध धन को कानूनी वित्तीय प्रणाली में डालने का प्रयास किया। इन संस्थाओं का उपयोग निर्माण और रियल एस्टेट के कारोबार में किया गया, ताकि काले धन को वैध रूप में परिवर्तित किया जा सके।
अधिकारियों का दावा और कोर्ट का रुख
विशेष PMLA कोर्ट ने पहले ही पवार के सहयोग न करने और सबूतों को नष्ट करने के आरोपों पर ध्यान केंद्रित किया है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह और ED के वकीलों ने कहा कि यह गिरोह बड़े पैमाने पर रिश्वत और अवैध निर्माण में संलिप्त था, जिसकी जांच अभी भी जारी है।











