ट्विशा शर्मा मौत मामले में अदालत का अहम फैसला
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान, ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़े मामले में कई महत्वपूर्ण तथ्य प्रकाश में आए। अदालत ने दूसरी पोस्टमार्टम और ताजा फॉरेंसिक जांच की याचिका को खारिज कर दिया, लेकिन साथ ही पुलिस को निर्देशित किया कि वे मध्य प्रदेश और अन्य प्रमुख शहरों में ऐसी चिकित्सा संस्थानों की पहचान करें, जहां अल्ट्रा-लो टेम्परेचर प्रिजर्वेशन की सुविधा उपलब्ध हो।
शव संरक्षण के लिए आवश्यक तापमान और वर्तमान स्थिति
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि फिलहाल शव को एम्स भोपाल की मोर्चरी में -4°C तापमान पर रखा गया है, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि शव को लंबी अवधि तक सुरक्षित रखने के लिए लगभग -80°C तापमान की आवश्यकता होती है। कोर्ट ने यह भी बताया कि शहर में ऐसी अत्याधुनिक शव संरक्षण सुविधा अभी उपलब्ध नहीं है। इस बीच, पुलिस ने मृतका के पिता को पत्र लिखकर शव को जल्द कब्जे में लेने का आग्रह किया है, क्योंकि अधिक समय तक शव रखने से उसकी खराब होने का खतरा बढ़ सकता है।
प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के नए पहलू
प्रारंभिक ऑटोप्सी रिपोर्ट के अनुसार, ट्विशा के गले पर दो समानांतर लिगेचर मार्क्स पाए गए हैं, जो फांसी में इस्तेमाल किए गए कथित सामग्री के दबाव से बने प्रतीत होते हैं। ये निशान लगभग 2 सेंटीमीटर चौड़े हैं और गर्दन के दोनों ओर ऊपर की तरफ पाए गए हैं। डॉक्टरों ने गर्दन के सेल्स में ब्लड फ्लो और कंजेशन का भी उल्लेख किया है। रिपोर्ट में मृत्यु का कारण एंटीमॉर्टम हैंगिंग को बताया गया है, जिससे संकेत मिलता है कि फांसी लगाते समय वह जीवित थीं। हालांकि, परिवार ने डबल लिगेचर मार्क्स मिलने के कारण जांच पर सवाल उठाए हैं।











