मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत का सिलसिला बढ़ता जा रहा है
मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व से एक दुखद खबर सामने आई है, जहां एक बाघिन के दूसरे शावक की भी मृत्यु हो गई है। इस घटना के बाद राज्य में इस वर्ष बाघों की कुल मौतें 22 तक पहुंच गई हैं। वन्यजीव प्रेमियों और विशेषज्ञों ने इन लगातार हो रही मौतों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है।
बाघिन के शावकों की मौत से बढ़ी चिंता, संरक्षण प्रयासों पर सवाल
स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि बाघिन ने चार बच्चों को जन्म दिया था, जिनमें से दो की मौत पहले ही हो चुकी है। अब दूसरे शावक की मौत के साथ ही बाघिन और उसके बाकी बचे दो बच्चों पर नजर रखी जा रही है। यह घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि बाघ संरक्षण के प्रयासों में अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं।
बाघों की मौतें और संरक्षण में बढ़ती चुनौतियां
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में जहां नौ बाघ अभयारण्य हैं, इस साल अब तक 22 बाघों की मौत दर्ज की गई है, जिनमें शावकों की मौतें भी शामिल हैं। सबसे पहली मौत बांधवगढ़ बाघ अभयारण्य में 7 जनवरी को हुई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन मौतों का कारण निगरानी और गश्त की कमी हो सकती है। वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने कहा कि मध्य प्रदेश में बाघों की बढ़ती मौतें चिंता का विषय हैं और उन्होंने वन विभाग से जवाबदेही की मांग की है। उन्होंने पन्ना बाघ अभयारण्य का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां एक बाघ की मौत के लगभग 20 दिन बाद उसका सड़ा-गला शव मिला था, जो संरक्षण व्यवस्था की कमियों को दर्शाता है।









