मध्य प्रदेश के सिंगरौली अस्पताल में सुरक्षा गार्ड का अनोखा इलाज का प्रयास
सिंगरौली जिले के चितरंगी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है एक वायरल वीडियो, जिसमें एक व्यक्ति मरीजों को ड्रिप चढ़ाते नजर आ रहा है। इस शख्स पर आरोप है कि वह अस्पताल का सुरक्षा गार्ड है, जो सामान्यतः सुरक्षा का जिम्मा संभालता है, लेकिन इस वीडियो में वह मरीजों के इलाज से जुड़ा काम कर रहा है।
स्थानीय लोगों का गुस्सा और सवालों की बौछार
यदि यह आरोप सही हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। वीडियो के सामने आने के बाद स्थानीय जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। उनका कहना है कि चितरंगी अस्पताल में यह कोई पहली बार नहीं है कि गैर-प्रशिक्षित कर्मचारी मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इससे पहले भी वार्ड बॉय द्वारा इंजेक्शन लगाने और ड्रिप चढ़ाने जैसी घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं। इस स्थिति में सवाल उठता है कि अस्पताल में जिम्मेदारी किसकी है और डॉक्टर या नर्सिंग स्टाफ कहां हैं?
जांच और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू
वीडियो बनाने वाले राकेश मौर्य का कहना है कि अस्पताल की व्यवस्था लंबे समय से सवालों के घेरे में है। उनका आरोप है कि कई बार ऐसी घटनाएं हुई हैं, जब मरीजों की देखभाल और इलाज का काम गैर-प्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा किया गया। सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह घटना दोपहर करीब 2 बजे की है, जब अस्पताल पूरी तरह से सक्रिय रहता है। सवाल उठता है कि उस समय सुरक्षा गार्ड ड्रिप क्यों लगा रहा था, जबकि उस वक्त अस्पताल में मौजूद डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मी कहां थे? क्या वे ड्यूटी पर नहीं थे या फिर जिम्मेदारी किसी और के हवाले कर दी गई थी?
स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है। सीएमएचओ सिंगरौली पुष्पराज सिंह ने बताया कि एक वीडियो उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर जानकारी मांगी है और साथ ही सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराने वाली संस्था को नोटिस भी जारी किया है। जांच जारी है और विभाग जिम्मेदार कर्मचारियों की पहचान करने का प्रयास कर रहा है। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि यदि अस्पताल में ड्रिप लगाने का काम सुरक्षा गार्ड कर रहा है, तो यह केवल एक वायरल वीडियो नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का असली चेहरा है, जो कागजों में तो ठीक दिखती है, लेकिन जमीन पर अक्सर फेल हो जाती है।










