मालवीय नगर अग्निकांड का नया खुलासा: लाइसेंस और फायर सेफ्टी नियमों में संदिग्धता
मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड की जांच में नए तथ्य सामने आए हैं, जिसमें 21 लोगों की जान चली गई। इस हादसे के पीछे की जाँच अब लाइसेंस, संचालन प्रक्रिया और फायर सेफ्टी नियमों में संभावित अनियमितताओं पर केंद्रित हो गई है। जानकारी के अनुसार, होटल का लाइसेंस मालिक के बजाय उसके अकाउंटेंट जय मिश्रा के नाम पर प्राप्त किया गया था, जो इस मामले को और भी जटिल बना रहा है।
अकाउंटेंट जय मिश्रा का भूमिका और लाइसेंस का विवाद
जांचकर्ताओं ने यह भी पता लगाया है कि बजाज के नाम पर मालिक होने के बावजूद, लाइसेंस एक कर्मचारी के नाम पर कैसे जारी किया गया। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि लाइसेंस प्रक्रिया में कोई मिलीभगत या अनियमितता तो नहीं हुई। जांच में यह भी सामने आया है कि मिश्रा के बयान काफी हद तक समान थे, जिससे संदेह और बढ़ गया है।
मिश्रा की भूमिका और आग लगने के समय की स्थिति
पुलिस को ज्ञात हुआ है कि जय मिश्रा पिछले दस वर्षों से बजाज के यहां अकाउंटेंट के रूप में कार्यरत था और कंपनी का भरोसेमंद कर्मचारी माना जाता था। उसे लगभग 35,000 रुपये मासिक वेतन मिलता था। जांच में यह भी पता चला कि होटल के दैनिक संचालन में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका थी, जिसमें शिफ्ट की निगरानी, कर्मचारियों की तैनाती और ड्यूटी रोस्टर का प्रबंधन शामिल था।
मिश्रा ने दावा किया कि सभी जरूरी दस्तावेज जैसे गेस्ट रजिस्टर, पहचान पत्र और लाइसेंस संबंधी कागजात होटल में ही रखे गए थे, लेकिन आग लगने के दौरान ये पूरी तरह नष्ट हो गए। जांच में यह भी पुष्टि हुई कि वह आग लगने के समय घटनास्थल पर मौजूद था। आग की सूचना मिलने के बाद वह सुबह लगभग 9:30 बजे होटल पहुंचा, जहां पहले से ही दमकलकर्मी बचाव और आग बुझाने का कार्य कर रहे थे। उसके बाद वह कुछ देर वहीं रुका रहा और फिर शहर के विभिन्न हिस्सों में छिप गया।
अब पुलिस उसकी गतिविधियों का विश्लेषण कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह क्यों घटनास्थल से भागा और उसकी गिरफ्तारी में देरी क्यों हुई। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि वह घटना के बाद किन गतिविधियों में लिप्त रहा।











