मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में जल योजना की हकीकत
राजगढ़ जिले में जल विभाग की ‘हर घर नल-जल योजना’ के दावों और वास्तविक स्थिति के बीच बड़ा फर्क नजर आ रहा है। विभागीय आंकड़ों में गांव-गांव तक नल से जल पहुंचाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीन पर स्थिति पूरी तरह से विपरीत है। जिले के शिवपुरी गांव में लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद ग्रामीण आज भी पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
गांव में नल तो लगे हैं, पर पानी नहीं
शिवपुरी गांव में घर-घर नल तो स्थापित कर दिए गए हैं, लेकिन इन नलों में अभी तक पानी नहीं आया है। स्थिति यह है कि ग्रामीण मजबूरी में अपने खेतों और घरों के पास मौजूद दो कुओं में मोटर लगाकर पाइपलाइन बिछा रहे हैं। इन पाइपों के जरिए पानी को घरों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन यह व्यवस्था भी पूरी तरह से फेल हो चुकी है। कुओं के अंदर मोटर और पाइपों का जाल साफ दिखाई देता है, जो गांव की जल व्यवस्था की बदहाली का संकेत है।
जल संकट और सरकारी दावों का फेल होना
गर्मी के मौसम में कुओं का जलस्तर घटने से ग्रामीणों को पानी की समस्या और भी गंभीर हो गई है। रवि सिंह, गोरी बाई, वल्लभ बाई, राजकुमार, राहुल और सुरेंद्र जैसे ग्रामीणों ने बताया कि जब वे पानी की आपूर्ति को लेकर शिकायत करते हैं, तो उन्हें जवाब मिलता है कि ‘बिल जमा होने पर ही नल चालू होंगे।’ वर्तमान में गांव में केवल दो कुएं हैं, जिनमें से एक का पानी लगभग खत्म हो चुका है। पूरे गांव की प्यास इन्हीं कुओं और तीन हैंडपंपों से बुझाई जा रही है, जिनमें से केवल एक ही सही ढंग से काम कर रहा है। 45 डिग्री की भीषण गर्मी में पानी की समस्या और भी विकट हो गई है।
प्रशासन का जवाब और समाधान की दिशा
जिला पंचायत के सीईओ डॉ. इच्छित गढ़पाले का कहना है कि इस मामले की जानकारी ली गई है। उन्होंने बताया कि ऑपरेटर की अनुपस्थिति के कारण पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है। प्रशासन जल्द ही जांच कर ग्रामीणों को पानी उपलब्ध कराने के प्रयास करेगा। इस तरह की स्थिति से स्पष्ट है कि सरकारी दावों और जमीन पर हकीकत के बीच बड़ा फर्क है, जो ग्रामीणों की जीवनशैली पर बुरा असर डाल रहा है।











