मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन विवादास्पद मामला
मध्य प्रदेश में वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के तहत वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन एक राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। इस नए बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों की नियुक्ति ने सियासी हलचल को तेज कर दिया है। कांग्रेस ने इस निर्णय को अनुचित करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का ऐलान किया है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सरकार के इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि वक्फ बोर्ड को केवल धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि यह संस्था मस्जिदों तक सीमित नहीं है। वक्फ बोर्ड के प्रमुख ने भी स्पष्ट किया कि यह कदम पूरी तरह से कानूनी प्रावधानों का पालन करते हुए उठाया गया है।
मध्य प्रदेश का पहला राज्य-स्तरीय वक्फ बोर्ड
रविवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मध्य प्रदेश के वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया, जिसमें दो हिंदू सदस्यों को शामिल किया गया है। यह नया वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के अंतर्गत गठित पहला राज्य-स्तरीय वक्फ बोर्ड है, जिसमें हिंदू सदस्यों को भी नियुक्त किया गया है। दस सदस्यीय इस बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में सनवर पटेल की नियुक्ति हुई है, जबकि मनोज मालपानी और अनिमेष भार्गव को हिंदू सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। सनवर पटेल को पहली बार 2023 में इस पद पर नियुक्त किया गया था, और अब उन्हें दूसरा कार्यकाल मिला है।
सियासी और कानूनी प्रतिक्रियाएँ
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि वक्फ अधिनियम से जुड़ा मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए ऐसी नियुक्तियों को अभी नहीं किया जाना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम कानूनी सवाल खड़े करता है और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने भी भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि यह कदम जनता का ध्यान राम मंदिर और अन्य मुद्दों से भटकाने के लिए उठाया गया है।
विपक्षी दलों के आरोपों का जवाब देते हुए वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि पुनर्गठन पूरी तरह से कानूनी प्रावधानों का पालन करते हुए किया गया है। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रही हैं। राज्य मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि यह भारत का पहला वक्फ एक्ट 2026 लागू करने वाला राज्य है, जिसमें हिंदू सदस्यों को शामिल किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि वक्फ बोर्ड का दायरा धार्मिक सीमाओं से बहुत बड़ा है और यह समाज के व्यापक हित में है।










