मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का मुहर्रम मेले पर महत्वपूर्ण फैसला
मध्य प्रदेश के इंदौर हाई कोर्ट (Indore High Court) ने मुहर्रम मेले को लेकर एक बड़ा निर्णय सुनाया है। अदालत ने इंदौर नगर निगम (Indore Municipal Corporation) की मेयर-इन-काउंसिल (Mayor-in-Council) द्वारा मेले की अनुमति रद्द करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने मेले की अनुमति फिर से बहाल करते हुए स्पष्ट किया कि नगर निगम ने उचित प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया था।
मुहर्रम मेले का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
यह मामला मुख्य रूप से मुहर्रम के पारंपरिक आयोजन से जुड़ा है, जिसे लेकर वक्फ कर्बला इंतजामिया कमेटी (Waqf Karbala Management Committee) ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने बताया कि हर साल यह कमेटी शहर के धोबी घाट (Dhobi Ghat) पर ताजिया जुलूस और मुहर्रम मेले का आयोजन करती आ रही है। इंदौर नगर निगम भी समय-समय पर इस आयोजन की लिखित अनुमति प्रदान करता रहा है। इस वर्ष भी नगर निगम ने 25 जून को एक आधिकारिक आदेश जारी कर 26 से 28 जून तक के लिए मेले की अनुमति दी थी, जिसके एवज में कमेटी ने निर्धारित फीस 1.36 लाख रुपये भी जमा कर दिए थे।
अदालत का निर्णय और प्रशासनिक प्रक्रिया का उल्लंघन
लेकिन, 25 जून की रात को ही मेयर-इन-काउंसिल ने अचानक एक आपातकालीन बैठक बुलाई और मेले की अनुमति रद्द करने का प्रस्ताव पारित कर दिया। वक्फ कमेटी का आरोप था कि उन्हें न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही उनका पक्ष सुना गया। हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान इंदौर नगर निगम ने तर्क दिया कि साल 2024 का एक पुराना अदालत का फैसला कहता है कि धोबी घाट पर केवल 0.02 एकड़ जमीन का पारंपरिक उपयोग होता है, और वह भी ताजिया विसर्जन के लिए है। निगम ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले साल कमेटी ने पूरी फीस नहीं दी और शर्तों का उल्लंघन किया।
लेकिन, न्यायालय ने इन तर्कों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने पाया कि 25 जून को जारी किया गया मंजूरी पत्र पिछले साल की शर्तों या बकाया का कोई उल्लेख नहीं करता। नगर निगम भी ऐसा कोई दस्तावेज प्रस्तुत करने में असमर्थ रहा, जिससे साबित हो कि पिछले साल की शर्तों का उल्लंघन हुआ हो। आवेदन 3 जून को ही दे दिया गया था, फिर भी निगम ने 25 जून तक इंतजार किया और बिना पूर्व सूचना के ही मंजूरी वापस ले ली।
अदालत ने स्पष्ट किया कि नगर निगम का यह व्यवहार प्रशासनिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। हाई कोर्ट ने वक्फ कमेटी की याचिका स्वीकार करते हुए 25 जून के मेयर-इन-काउंसिल प्रस्ताव को तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया और मेले की अनुमति फिर से बहाल कर दी। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि यह आदेश केवल इस साल के लिए मान्य है और हर साल कार्यक्रम आयोजित करने का स्थायी अधिकार इस फैसले से प्रभावित नहीं होता।
भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए कोर्ट ने निर्देश दिया कि आयोजन समिति को मेले से कम से कम ढाई महीने पहले आवेदन देना होगा, और नगर निगम को 30 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय लेना होगा। इस निर्णय से प्रशासनिक पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करने की दिशा में कदम माना जा रहा है।











