मध्य प्रदेश में मूंग खरीद नीति पर किसान और सरकार के बीच टकराव जारी
मध्य प्रदेश में मूंग की खरीद को लेकर सरकार और किसानों के बीच गतिरोध बना हुआ है। सरकार की ओर से तय की गई खरीद नीति पर किसान असंतुष्ट हैं, जिसके कारण उन्होंने अपने प्रदर्शन को जारी रखने का निर्णय लिया है। इससे पहले बुधवार रात को सरकार और किसानों के बीच तीन घंटे की बैठक हुई, जिसमें सरकार ने मूंग खरीद का प्रतिशत बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा।
बैठक में मौजूद किसानों ने इस प्रस्ताव को लेकर संतोष व्यक्त किया था, लेकिन बाद में आधिकारिक बयान में कहा गया कि सहमति नहीं बन पाई है। इसके बाद प्रदर्शनकारी किसान और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति भी बनी, जिसमें हल्की झड़पें हुईं। पुलिस ने लाउडस्पीकर के माध्यम से किसानों से शांति बनाए रखने की अपील की।
मध्य प्रदेश सरकार का नया मूंग खरीद फैसला और किसानों की प्रतिक्रिया
मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों से हुई चर्चा के बाद घोषणा की कि अब हर पात्र किसान से उसकी मूंग उपज का 60 प्रतिशत खरीदा जाएगा, जबकि पहले यह सीमा 25 प्रतिशत थी। यह निर्णय नर्मदापुरम, सीहोर और हरदा जैसे जिलों में लगभग तीन क्विंटल प्रति एकड़ उपज के हिसाब से लागू किया जाएगा। सरकार ने इस फैसले को तुरंत प्रभाव से लागू करने का भी संकेत दिया है।
कृषि मंत्री ने बताया कि इस नई नीति का उद्देश्य किसानों को अधिक समर्थन देना है, ताकि उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके। साथ ही, सरकार ने स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि भी 10 अगस्त तक बढ़ाने का निर्णय लिया है, ताकि किसानों को अधिक समय मिल सके। इसके अलावा, ई-टोकन व्यवस्था को भी अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया है, ताकि खाद वितरण में कोई बाधा न आए।
किसानों की मुख्य मांग और सरकार के फैसले पर असंतोष
भारतीय किसान यूनियन के प्रतिनिधियों ने कहा कि किसानों ने अपनी बात रखी, लेकिन सरकार उनकी बातों से सहमत नहीं हुई। किसान अपनी मुख्य मांग 100 प्रतिशत मूंग खरीद की है, जबकि सरकार ने केवल 60 प्रतिशत खरीद का ही आश्वासन दिया है। किसान का कहना है कि उनके पास लगभग 4 से 6.5 क्विंटल उपज बचती है, और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर भी उन्हें भारी नुकसान हो रहा है।
किसानों का आरोप है कि सरकार ने उनकी बात नहीं मानी और मुआवजे के प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया। किसान नेता ने कहा कि वे अपनी मांग पर अड़े हैं और बातचीत के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लेंगे। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद किसान भी इस बात पर सहमत हैं कि जब तक सरकार उनकी मुख्य मांग पूरी नहीं करती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।










