मध्य प्रदेश में सरकारी अधिकारियों का संघीकरण पर बड़ा बयान
मध्य प्रदेश सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच बढ़ते संघीकरण को लेकर राजनीति गरमाई हुई है। कैलाश विजयवर्गीय ने इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य की सरकारी व्यवस्था में हर अधिकारी खुद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक (RSS) का सदस्य बताने का प्रयास कर रहा है।
उन्होंने कहा कि जब भी कोई अधिकारी सरकार में शामिल होता है, तो वह अपने पूर्व के संघीय जुड़ाव का जिक्र करता है। एक अधिकारी ने बताया कि उसके पिता शाखा में भाग लेते थे, जबकि दूसरे ने कहा कि उनके पिता शाखा के अध्यक्ष थे। विजयवर्गीय ने इस स्थिति को चिंता का विषय बताते हुए कहा कि इस भीड़ में अच्छे लोगों की कमी हो रही है।
संघीकरण के बढ़ते प्रभाव और समाज में उसकी भूमिका
विजयवर्गीय ने कहा कि संगठन का विस्तार तो हो रहा है, लेकिन यदि इस भीड़ में अच्छे इंसान नहीं होंगे, तो विचारधारा का क्या लाभ? उन्होंने इस मुद्दे पर गहरी सोच और मनन की आवश्यकता पर बल दिया। संगठन की बढ़ती संख्या और विचारधारा के प्रचार के बावजूद, समाज में नैतिक मूल्यों का ह्रास चिंता का विषय है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि समाज में अच्छे लोग नहीं होंगे, तो इस विचारधारा का कोई महत्व नहीं रह जाएगा। इस संदर्भ में समाज में जागरूकता और नैतिक मूल्यों को बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।
विजयवर्गीय का राजनीतिक बयान और विवाद
इससे पहले, कैलाश विजयवर्गीय ने विवादित बयान देते हुए कहा था कि यदि मुसलमान दूसरे धर्म के नेताओं को ‘काफिर’ कहते हैं, तो उन्हें उनके बनाए रास्तों पर नहीं चलना चाहिए और लाड़ली बहना जैसी योजनाओं का लाभ नहीं लेना चाहिए।
उन्होंने इंदौर में एक कार्यक्रम में कहा था कि यदि हम काफिर हैं और सरकार की योजनाओं का पैसा आपके घर आ रहा है, तो उसे स्वीकार न करें। विजयवर्गीय का यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया था, जिसमें विपक्ष ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी।










