खंडवा में आवारा कुत्तों की समस्या और नसबंदी अभियान पर सवाल
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक अनोखी घटना ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। एक व्यक्ति ने डॉगी का मुखौटा पहनकर अपनी शिकायत प्रस्तुत की, जिसने वहां मौजूद अधिकारियों और जनता दोनों को हैरान कर दिया। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके नसबंदी कार्यक्रम में हो रहे खर्च को लेकर था। इस घटना ने नगर निगम की वर्तमान व्यवस्था और उसकी प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डॉगी का मुखौटा पहनकर विरोध प्रदर्शन और नसबंदी पर आरोप
जनसुनवाई में पेश किए गए इस अनूठे विरोध प्रदर्शन का सबसे दिलचस्प हिस्सा था उस व्यक्ति का डॉगी का मुखौटा पहनना। राठौर ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि कुत्तों की नसबंदी के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए गए, फिर भी आवारा कुत्तों की संख्या में कोई कमी नहीं आई। उन्होंने एक डॉगी की ओर संकेत करते हुए कहा कि उसकी भी नसबंदी कराई गई थी, लेकिन वह छह बच्चों का पिता बन गया। इस तरह के तर्क से उन्होंने नसबंदी अभियान में कथित गड़बड़ी और खर्च की जांच की मांग उठाई। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
आवारा कुत्तों की संख्या और डॉग बाइट के आंकड़े
नेता प्रतिपक्ष ने अधिकारियों के सामने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों में खंडवा में 13,225 लोग कुत्तों के काटने की घटनाओं का शिकार हुए हैं। उनका सवाल था कि यदि नगर निगम लगातार नसबंदी कर रहा है और लाखों रुपये खर्च कर रहा है, तो फिर आवारा कुत्तों की संख्या और डॉग बाइट की घटनाएं क्यों नहीं कम हो रही हैं। इस संदर्भ में उन्होंने मामले की जांच की मांग की।
जनसुनवाई के दौरान जब राठौर डॉगी का मुखौटा पहनकर पहुंचे, तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। कुछ देर बहस के बाद अधिकारियों ने उन्हें अंदर आने की अनुमति दी। इस पूरे घटनाक्रम को देखकर वहां मौजूद लोगों के चेहरे पर मुस्कान भी आई। राठौर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि कुछ अधिकारी अच्छे भी हैं, इसलिए उन्हें मत काटो। इस तरह का विरोध प्रदर्शन शहर में लंबे समय से चल रही आवारा कुत्तों की समस्या को उजागर करता है, जिसे लेकर जनता में नाराजगी व्याप्त है।











