मध्यप्रदेश में जंगली भैंसों का पुनर्वास अभियान
मध्यप्रदेश अब फिर से जंगली भैंसों को अपने प्राकृतिक आवास में बसाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। असम के काजीरंगा (Kaziranga) नेशनल पार्क से लाए गए चार जंगली भैंसों को शुक्रवार को कान्हा टाइगर रिजर्व (KTR) के सुपखर रेंज में विशेष रूप से तैयार किए गए बाड़े में छोड़ा गया। यह कदम प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों में एक नई दिशा दिखाता है।
प्राचीन विलुप्तप्राय प्रजाति का पुनः अस्तित्व में आना
लगभग सौ साल पहले मध्यप्रदेश के जंगलों से जंगली भैंसें विलुप्त हो गई थीं। सुपखर क्षेत्र, जहां इन पशुओं को छोड़ा गया है, ऐतिहासिक रूप से इनका प्राकृतिक आवास रहा है। इस पुनर्वास परियोजना का मुख्य उद्देश्य इस महत्वपूर्ण प्रजाति को फिर से प्रदेश के ईकोसिस्टम का अभिन्न हिस्सा बनाना है।
लंबी यात्रा और सफलतापूर्वक पुनर्स्थापना
काजीरंगा से कान्हा तक इन जंगली भैंसों को लाने का सफर आसान नहीं था। करीब 2220 किलोमीटर की दूरी को विशेष वाहनों में तय करने में 72 घंटे का समय लगा। इस दौरान दो विशेषज्ञ वन्यजीव चिकित्सकों की टीम ने इन पशुओं के स्वास्थ्य का लगातार ध्यान रखा। इससे पहले 28 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस परियोजना के पहले चरण में चार भैंसों को बाड़े में छोड़ा था। अब इन नए सदस्यों के जुड़ने के साथ ही कान्हा में इनकी संख्या आठ हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में और भी भैंसों को यहां लाया जाएगा।









