बिहार का वित्तीय बजट 2026-27: विकास का नया आयाम
बिहार के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने मंगलवार को विधानसभा में आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया। इस बजट में नीतीश सरकार ने ‘सात निश्चय-3’ के विजन के साथ 3.47 लाख करोड़ रुपये का रोडमैप रखा है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 30,695 करोड़ रुपये अधिक है। इसे बिहार के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा बजट माना जा रहा है। इस बजट में सरकार ने शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन को अपनी मुख्य प्राथमिकता बनाई है। बजट भाषण केवल 11 मिनट का था, जो बिहार विधानसभा में अब तक का सबसे संक्षिप्त बजट भाषण माना जा रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि इस विशाल बजट के माध्यम से सरकार का लक्ष्य 2025 से 2030 के बीच एक करोड़ नए रोजगार सृजित करने का है, साथ ही कृषि रोडमैप-4 के तहत किसानों की आय बढ़ाने का भी संकल्प लिया गया है।
बजट का मुख्य फोकस: शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास
वित्त मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस बजट को ज्ञान, ईमान, विज्ञान, अरमान और सम्मान के पांच संकल्पों पर आधारित किया है। सरकार का उद्देश्य ‘सबका सम्मान, जीवन आसान’ के मंत्र के साथ हर वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ना है। इस बजट में सबसे अधिक ध्यान शिक्षा क्षेत्र पर केंद्रित है, जहां उच्च शिक्षा और प्राथमिक शिक्षा के लिए कुल 68,217 करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन किया गया है, जो किसी भी विभाग के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजट है। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण विकास के लिए 23,701 करोड़ रुपये, स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 21,270 करोड़ रुपये और गृह विभाग के लिए 20,133 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सड़क और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए ग्रामीण कार्य और पथ निर्माण विभाग को संयुक्त रूप से 18,717 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
किसानों और सामाजिक न्याय के लिए विशेष योजनाएं
बजट में किसानों का विशेष ध्यान रखते हुए मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत हर साल 3,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता का ऐलान किया गया है। साथ ही, कृषि रोडमैप-4 के तहत हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचाने, गंगा जल योजना, बिजली उत्पादन और खपत बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। सामाजिक न्याय के क्षेत्र में अनुसूचित जाति के लिए 19,603 करोड़ रुपये और जनजाति कल्याण के लिए 1,648 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उल्लेखनीय है कि इतनी अधिक खर्च के बावजूद भी राज्य का राजकोषीय घाटा 3 प्रतिशत से नीचे बनाए रखा गया है, जिससे वित्तीय स्थिरता बनी रहे।










