मध्यप्रदेश में अनिका शर्मा का जीवन संकट में
इंदौर की तीन वर्षीय बच्ची अनिका शर्मा गंभीर स्पाइनल मस्क्युलर एट्रोफी (SMA) टाइप-2 जैसी दुर्लभ बीमारी से जूझ रही है, और उसका इलाज अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। इस मासूम के लिए आवश्यक उपचार के लिए परिवार, समाज और विभिन्न संस्थाओं ने मिलकर अधिकांश धनराशि जुटाई है, लेकिन फिर भी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी के कारण उसकी जिंदगी खतरे में है।
हाईकोर्ट ने एम्स की कार्यप्रणाली पर जताई चिंता
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली (Delhi) के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की। अदालत ने पाया कि बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद एम्स की ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया है। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 23 जुलाई 2026 तक जवाब प्रस्तुत किया जाए। अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।
मामले की वर्तमान स्थिति और न्यायालय का रुख
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत को बताया कि इलाज के लिए अब केवल सीमित राशि की आवश्यकता है, लेकिन एम्स की प्रक्रियाओं में विलंब के कारण जीवनरक्षक इंजेक्शन की खरीद में बाधा आ रही है। केंद्र सरकार से स्वीकृत सहायता की प्रक्रिया लंबित है और क्राउडफंडिंग से जुटाई गई राशि भी इनवॉइस की अनुपस्थिति में जारी नहीं हो पा रही है। हाईकोर्ट ने संकेत दिए हैं कि इस संवेदनशील मामले में अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, क्योंकि हर गुजरता दिन अनिका की जिंदगी और उम्मीद के बीच की दूरी बढ़ा रहा है।











