इंदौर में हनीट्रैप गैंग का खुलासा: जेल से शुरू हुआ जाल
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में हनीट्रैप से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें नई जानकारी ने सभी को चौंका दिया है। पुलिस की जांच में पता चला है कि जेल में बंद दो महिलाओं श्वेता और अलका की दोस्ती जेल से बाहर आने के बाद एक संगठित हनीट्रैप नेटवर्क में बदल गई। इन महिलाओं ने मिलकर कारोबारियों, धनी व्यक्तियों और राजनीतिक संपर्क रखने वालों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। इस मामले में पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिससे इस जाल का खुलासा और भी बड़ा हो गया है।
सामाजिक मीडिया का इस्तेमाल कर बनता था जाल
जानकारी के अनुसार, श्वेता और अलका अलग-अलग मामलों में जेल गई थीं, लेकिन जेल से बाहर आने के बाद दोनों ने मिलकर एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया। पुलिस का कहना है कि ये महिलाएं सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप और कॉलिंग के माध्यम से अपने टारगेट का चयन करती थीं। पहले वे दोस्ती बढ़ाती थीं, फिर वीडियो कॉल और व्यक्तिगत मुलाकातों के जरिए संवेदनशील वीडियो और फोटो तैयार कर लेती थीं। इन कंटेंट का इस्तेमाल बाद में पीड़ितों को ब्लैकमेल करने के लिए किया जाता था।
संपर्कों की लिस्ट और डिजिटल साक्ष्य की जांच जारी
पुलिस सूत्रों का कहना है कि गैंग के पास हाई-प्रोफाइल संपर्कों की एक सूची भी मिली है, जिसका उपयोग नए टारगेट चुनने में किया जाता था। पुलिस अब दोनों महिलाओं के कॉल डिटेल्स, बैंक ट्रांजेक्शन्स और सोशल मीडिया चैट्स की गहराई से जांच कर रही है। क्राइम ब्रांच के डीसीपी राजेश त्रिपाठी ने बताया कि मोबाइल से मिले डेटा के आधार पर अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान की जा रही है। हालांकि, कई आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन फॉर्मेट कर दिए हैं, जिससे डिजिटल साक्ष्य जुटाने में कठिनाई हो रही है।











