मध्य प्रदेश में साइबर अपराधियों का नया खेल: डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर ठगी
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में साइबर अपराधियों ने एक बार फिर डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर बड़ी धोखाधड़ी को अंजाम दिया है। बीते एक महीने के भीतर यह दूसरा बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें ठगों ने दिल्ली पुलिस का नाम लेकर एक रिटायर्ड बैंक अधिकारी से 23 लाख 50 हजार रुपये की ठगी कर ली।
रिटायर्ड बैंक अधिकारी को फर्जी कॉल और धमकी का शिकार बनाना
27 नवंबर को बैतूल निवासी रिटायर्ड बैंक अधिकारी बसंत कुमार मेदमवार के मोबाइल पर एक कॉल आई, जिसमें कॉलर आईडी पर दिल्ली पुलिस लिखा हुआ था। कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि बसंत कुमार के आधार कार्ड का इस्तेमाल कर एक फर्जी सिम ली गई है, जिसका उपयोग बड़े साइबर अपराध में हुआ है। साथ ही उनके घर में रखे सोने को भी अवैध बताया गया। धमकी और गिरफ्तारी के डर से बुजुर्ग मानसिक दबाव में आ गए।
डिजिटल अरेस्ट में रखकर ठगों ने की लाखों की ठगी
इसके बाद साइबर ठगों ने उन्हें लगातार वीडियो कॉल और फोन पर निगरानी में रखते हुए तीन दिनों तक तथाकथित डिजिटल अरेस्ट में रखा। इस दौरान उन्होंने दो किस्तों में 23 लाख 50 हजार रुपये ठगों के बताए गए खातों में ट्रांसफर कर दिए। शेष रकम के लिए ठगों के निर्देश पर बसंत कुमार बैंक में गोल्ड लोन लेने पहुंचे। बैंक मैनेजर ने जब देखा कि वे लगातार किसी के निर्देश पर घबराए हुए हैं, तो उसने तुरंत पुलिस को सूचित किया।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बुजुर्ग को समझाया कि वे साइबर ठगों के जाल में फंसे हैं। समय रहते गोल्ड लोन की प्रक्रिया रुकवाकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट से मुक्त कराया गया, हालांकि तब तक वे बड़ी रकम गंवा चुके थे। पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।










