जबलपुर के बरगी बांध में क्रूज हादसे का दर्दनाक असर
जबलपुर (Jabalpur) के बरगी बांध (Barghi Dam) में हुए भीषण क्रूज दुर्घटना ने पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ा दी है। इस हादसे में कई लोगों की जान चली गई, लेकिन इस त्रासदी के बीच एक ऐसी कहानी भी सामने आई है जिसने हर किसी का दिल छू लिया है। एक बच्चे को जीवित बचाने में सफलता मिली है, जो अगले ही दिन अपना पहला जन्मदिन मनाने वाला था। परिवार ने इस अवसर को सादगी से मनाने का फैसला किया, मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए और मंदिर जाकर प्रार्थना कर।
हादसे की पूरी कहानी और परिवार की जद्दोजहद
यह घटना उस समय हुई जब परिवार के सदस्य बरगी डैम के पास स्थित शिव मंदिर में दर्शन कर लौट रहे थे। परिवार में रोशन आनंद वर्मा, उनकी पत्नी, बेटी, एक साल का बेटा, साली और एक साडू शामिल थे। 30 अप्रैल को मौसम साफ था और परिवार ने क्रूज पर सवार होने से पहले मंदिर में पूजा की। लगभग 45 मिनट की यात्रा के बाद, जब क्रूज वापस डॉकिंग स्टेशन की ओर लौट रहा था, तभी अचानक मौसम ने करवट ली। तेज हवाओं और ऊंची लहरों ने पानी को समुद्र जैसी स्थिति में ला दिया। इस दौरान यात्रियों में हड़कंप मच गया।
बचाव के प्रयास और परिवार का संघर्ष
रोशन और उनके साडू ने स्थिति बिगड़ते देख तुरंत लाइफ जैकेट निकालकर यात्रियों में बांटना शुरू किया। इसी बीच, पानी भरने लगा और क्रूज डूबने लगा। परिवार के सदस्यों ने अपने जीवन की परवाह किए बिना, अपने एक साल के बच्चे का हाथ पकड़कर पानी में छलांग लगाई। किनारे की दूरी लगभग 150 मीटर थी, और पूरे समय उन्होंने अपने बच्चे का हाथ नहीं छोड़ा। अंततः, बचाव दल ने रोशन को सबसे आखिरी में सुरक्षित निकाला। यह अनुभव उनके जीवन का सबसे कठिन और भावुक पल बन गया।
शोक और श्रद्धांजलि के बीच मनाया गया बच्चे का पहला जन्मदिन
हादसे के बाद परिवार ने अपने बच्चे का पहला जन्मदिन सादगी से मनाने का निर्णय लिया। इस दिन उन्होंने मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और भगवान का धन्यवाद किया। परिवार ने अगले दिन मंदिर जाकर पूजा-अर्चना की और अपने प्रियजनों को श्रद्धांजलि दी। रोशन ने बताया कि वे अब 5 मई को वैष्णो देवी (Vaishno Devi) जाकर माथा टेकने की योजना बना रहे हैं।
क्रूज चालक दल पर आरोप और जांच का आदेश
परिवार का आरोप है कि क्रूज का चालक दल हादसे के समय यात्रियों को छोड़कर सबसे पहले लाइफ जैकेट पहनकर कूद गया। रोशन और उनके साडू ने कहा कि चालक दल को पहले यात्रियों को सुरक्षित निकालना चाहिए था। इस घटना की जांच में यह एक महत्वपूर्ण पहलू बन गया है। पुलिस ने बताया कि हादसे में मृतकों की संख्या अब तक 10 पहुंच गई है, जिनमें से एक बच्चे का शव भी बरामद किया गया है। अभी भी तीन लोग लापता हैं, जिनमें खमरिया आयुध फैक्ट्री (Khmeriya Ammunition Factory) के कर्मचारी कमराज, उनका पांच वर्षीय बेटा तमिल और एक अन्य पांच वर्षीय बच्ची शामिल हैं।
बचाव अभियान और जांच की दिशा
गहरे पानी में खोजबीन के लिए विशेष उपकरण और जनरेटर का इस्तेमाल किया जा रहा है। सुबह से शुरू हुए इस खोज अभियान में एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय गोताखोर शामिल हैं। करीब 200 से अधिक बचावकर्मी इस मिशन में लगे हैं, जिनमें सेना के 20 गोताखोर भी शामिल हैं। तेज हवाओं के कारण कुछ समय के लिए अभियान प्रभावित हुआ, लेकिन फिर से शुरू कर दिया गया है। पोस्टमार्टम के बाद नौ मृतकों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है। प्रशासन का कहना है कि लापता लोगों की खोज प्राथमिकता है और इस हादसे की पूरी जांच की जाएगी।









