भोपाल के ’90 डिग्री ब्रिज’ पर नई जानकारी और विवाद
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित ऐशबाग रेल ओवरब्रिज एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर इस पुल को लेकर तीखी आलोचनाएँ हुई थीं, जिसमें इसे 90 डिग्री का बताया गया था। अब PWD मंत्री राकेश सिंह ने इस मामले में स्पष्टता दी है। उन्होंने विधानसभा में कहा कि यह पुल वास्तव में 119 डिग्री का है, न कि 90 डिग्री जैसा कि अफवाह फैली थी। हाईकोर्ट की जांच में भी यह तथ्य सामने आया है कि पुल का सही कोण 119 डिग्री ही है।
मंत्री का तर्क और तकनीकी पहलू
राकेश सिंह ने बताया कि नई शहर बसाते समय हम आदर्श डिजाइन का पालन कर सकते हैं, लेकिन पुराने शहरों में उपलब्ध जगह के आधार पर ही विकास कार्य करने पड़ते हैं। विकसित देशों और राज्यों में भी 90 डिग्री के ब्रिज और सड़कें मौजूद हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि असली समस्या पुल की डिग्री में नहीं, बल्कि उसकी स्लोप (ढाल) और कर्व (घुमाव) में थी। सही तकनीकी मानकों का अभाव ही वाहन चालकों को परेशानियों का कारण बना, जिसके चलते संबंधित इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
अब तक की कार्रवाई और विवाद का समाधान
बता दें कि इस पुल की लागत लगभग 18 करोड़ रुपये थी, और यह तब चर्चा में आया था जब यह पता चला कि इसकी डिजाइन 90 डिग्री की है, जिससे दुर्घटना का खतरा था। इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने 28 जून को सात इंजीनियरों को सस्पेंड कर दिया था और एक रिटायर्ड इंजीनियर के खिलाफ विभागीय जांच का आदेश दिया था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुल में सुधार के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया गया और निर्माण एजेंसी तथा डिजाइन सलाहकार को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया।











