हरियाणा में राज्यसभा चुनाव की राजनीतिक जंग तेज
हरियाणा में आगामी राज्यसभा चुनाव की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, जहां राजनीतिक दलों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। इस बार बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दल अपने-अपने उम्मीदवार उतारने की योजना बना रहे हैं। बीजेपी का मकसद है कि वह ऐसे उम्मीदवार को मैदान में उतारे, जिससे सियासी खेल को अपने पक्ष में मोड़ा जा सके। वहीं, कांग्रेस के पास संख्या बल होने के बावजूद अंदरूनी गुटबाजी का खतरा मंडरा रहा है।
हरियाणा में राज्यसभा चुनाव का इतिहास और वर्तमान स्थिति
हरियाणा की विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं, जिनमें से बीजेपी के 48 विधायक, कांग्रेस के 37, दो विधायक इनेलो (इंडियन नेशनल लोकदल) और तीन निर्दलीय हैं। इस आधार पर कांग्रेस के लिए एक सीट जीतना आसान माना जा रहा है, लेकिन पहले भी ऐसा हो चुका है कि संख्याबल होने के बावजूद कांग्रेस का प्रत्याशी हार गया है। 2016 और 2022 के चुनावों में क्रॉस वोटिंग और अंदरूनी गुटबाजी ने कांग्रेस को निराश किया है। इन चुनावों में विधायकों की वोटिंग का खेल बहुत ही नाजुक और जटिल रहा है, जहां गलत वोटिंग ने परिणाम बदल दिए।
भविष्य की चुनौतियां और राजनीतिक रणनीतियां
16 मार्च को होने वाले हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों के समर्थन में रणनीति बनाई है, जिसमें निर्दलीय उम्मीदवारों को फिर से मैदान में उतारने की संभावना है। कांग्रेस अपने विधायकों की संख्या पर भरोसा कर रही है, लेकिन गुटबाजी और अंदरूनी मतभेद उसकी राह में बाधा बन सकते हैं। इतिहास से पता चलता है कि वोटों की संख्या से अधिक क्रॉस वोटिंग का खेल चुनाव का परिणाम तय कर सकता है। अब देखना है कि इस बार भी अंदरूनी फूट का खेल फिर से खेला जाएगा या कांग्रेस अपनी जीत का परचम लहराएगी।









