गुरुग्राम में युवराज सिंह मनचंदा की हत्या का खुलासा
दिल्ली के सरिता विहार निवासी युवराज सिंह मनचंदा की हत्या के मामले में पुलिस ने उसकी पूर्व सहकर्मी आन्या वत्स और उसके लिव-इन पार्टनर संयम सचदेवा को गिरफ्तार कर लिया है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि हत्या का मुख्य कारण पैसों का विवाद था। पुलिस के अनुसार, इसी विवाद के दौरान युवराज की गर्दन में दो गोलियां मारी गईं। युवराज गुरुग्राम के सेक्टर-29 में स्थित अडानी रियल्टी कंपनी में प्रबंधक था। वह 6 सितंबर को दिल्ली से गुरुग्राम आया था, जहां उसकी शादी की तैयारी चल रही थी। उस दिन वह अपनी बहन के साथ शादी की खरीदारी कर रहा था, लेकिन शाम को वह एक ऐसी मुलाकात के लिए पहुंचा, जिसने उसकी जान ले ली।
हत्या का कारण और पुलिस की जांच
पुलिस की जांच में सामने आया है कि युवराज और उसकी पूर्व सहकर्मी आन्या वत्स के बीच पहले से ही वित्तीय लेन-देन का विवाद था। गुरुग्राम में मुलाकात के दौरान दोनों के बीच इसी मुद्दे को लेकर तकरार हुई। विवाद बढ़ने पर युवराज की गर्दन में दो गोलियां मारी गईं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपी आन्या और संयम ने शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई। दोनों ने युवराज का शव कार में ही रखा और फिर उसे गुरुग्राम के सेक्टर-70 में एक नाले में फेंक दिया। इसके बाद दोनों उत्तराखंड चले गए, जहां उन्होंने कैंची धाम में शरण ली।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
युवराज का शव कम से कम दो दिनों तक कार में रहा, और आरोपी गुरुग्राम में ही घूमते रहे। अंततः उन्होंने शव को फेंकने के लिए उपयुक्त जगह की तलाश की और उसे नाले में डाल दिया। पुलिस ने युवराज की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की। उसकी बहन ने 11 सितंबर को लाजपत नगर थाने में गुमशुदगी की शिकायत दी। जांच के दौरान पता चला कि युवराज की बातचीत उसकी पूर्व सहकर्मी आन्या वत्स से हुई थी। पुलिस ने उसकी लोकेशन उत्तराखंड में पाई और वहां से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों ने हत्या में अपनी भूमिका स्वीकार की।











