दिल्ली नगर निगम ने PG इमारतों की सुरक्षा के लिए किया व्यापक सर्वे
दिल्ली नगर निगम ने पीजी (PG) इमारतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक विस्तृत सर्वेक्षण अभियान चलाया है, जिसमें कुल 1355 इमारतों की जांच की गई है। इस सर्वे में केवल तीन इमारतें अत्यंत खतरनाक पाई गई हैं, जिनमें कुल 69 लोग रह रहे हैं। इसके अलावा नौ इमारतों में बड़े स्तर पर मरम्मत की आवश्यकता है, जबकि 39 इमारतों में मामूली मरम्मत का काम किया गया है। सत्य निकेतन हादसे के बाद सुरक्षा के प्रति सख्ती बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
खतरनाक और संवेदनशील इमारतों की पहचान और कार्रवाई
सर्वे के दौरान साउथ जोन-1 में तीन खतरनाक इमारतें मिली हैं, जिनमें रहने वाले लोगों की संख्या काफी अधिक है। इस क्षेत्र में अभी भी सर्वे का कार्य जारी है, इसलिए आने वाले दिनों में आंकड़ों में बदलाव संभव है। इन खतरनाक इमारतों में कुल 140 लोग रहते हैं, जिनमें से पांच इमारतें केशव पुरम में हैं, जहां 36 लोग निवास करते हैं। नजफगढ़ में दो इमारतें हैं, जिनमें 38 लोग रहते हैं, और साउथ जोन-2 में दो इमारतों में 66 लोग रह रहे हैं।
छोटी मरम्मत और भविष्य की सुरक्षा के लिए कदम
मकान सर्वेक्षण में 39 ऐसी इमारतें भी मिली हैं, जिन्हें मामूली मरम्मत की जरूरत है। इन इमारतों में कुल 664 लोग रहते हैं। इसके अतिरिक्त, कुछ इमारतें ऐसी भी चिन्हित की गई हैं, जो भविष्य में खतरे का संकेत दे सकती हैं। सिविल लाइंस में G+4 से अधिक ऊंची 21 इमारतें मिली हैं, जिनमें लगभग 420 लोग रहते हैं। शाहदरा साउथ जोन-2 में ऐसी 57 इमारतें हैं, जिनमें 2036 लोग निवास कर रहे हैं। करोल बाग में सात इमारतें हैं, जिनमें 106 लोग रहते हैं। शाहदरा साउथ जोन-1 और नजफगढ़ में भी कुछ संवेदनशील इमारतें चिन्हित हुई हैं।










