दिल्ली में अवैध निर्माण के खिलाफ तेज कार्रवाई जारी
राजधानी दिल्ली में हाल ही में सत्य निकेतन में हुए इमारत हादसे के बाद से नगर निगम (MCD) ने अपने कदम और भी मजबूत कर दिए हैं। शहर के विभिन्न इलाकों में अवैध निर्माण और खतरनाक इमारतों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जा रहा है। पूर्वी दिल्ली के कई क्षेत्रों में गुरुवार को भी तोड़फोड़ और सीलिंग का कार्य जारी रहा।
दिल्ली के ऐतिहासिक चांदनी चौक के कुचामहाजनी मार्केट में भी MCD ने कार्रवाई शुरू कर दी है। यहाँ अब तक 55 दुकानों को सील किया गया है। ललिता पार्क, लक्ष्मी नगर, मधु विहार और न्यू अशोक नगर जैसे इलाकों में बुलडोजर और हथौड़ों का इस्तेमाल कर अवैध निर्माण को तोड़ा जा रहा है। लक्ष्मी नगर के डी-ब्लॉक में भी अवैध इमारतों के खिलाफ मैन्युअल डिमोलिशन अभियान चलाया जा रहा है।
संपत्तियों पर कार्रवाई और जागरूकता अभियान
मौजूदा समय में MCD ने 17 प्रॉपर्टीज को सील किया है और 34 इमारतों को तोड़ा है। यह कार्रवाई पिछले तीन दिनों में की गई है, जिसमें अवैध निर्माण को रोकने के लिए कड़ी मेहनत की गई है। जगत पुरी क्षेत्र में भी अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया गया है, जहां पुलिस की मौजूदगी में तोड़फोड़ की गई है।
सत्य निकेतन में 6 सितंबर को ढहे मकान के पास खड़ी असुरक्षित इमारत को गिराने का काम भी लगातार जारी है। न्यू अशोक नगर में MCD ने मयूर कुंज सोसायटी के टॉप फ्लोर पर चल रहे अवैध निर्माण को भी तोड़ने का अभियान चलाया है। यहां पहले नोटिस जारी किया गया था, लेकिन निर्माण जारी रहा, इसलिए अब तोड़फोड़ की कार्रवाई की जा रही है।
सुरक्षा और सर्वेक्षण के लिए कदम उठाए गए
सत्य निकेतन हादसे के बाद प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। दक्षिण दिल्ली के इस क्षेत्र में पीजी इमारत के ढहने से सात लोगों की मौत के बाद निगम ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। अब तक 12 जोनों में 34 संपत्तियों पर बुलडोजर चलाया गया है और 17 इमारतें सील की गई हैं। साथ ही, दिल्ली के मास्टर प्लान 2047 के तहत अवैध निर्माण, अनधिकृत पीजी और जर्जर इमारतों का सर्वे और सीलिंग अभियान चलाया जा रहा है।
मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली नगर निगम ने लगभग 1243 पीजी इमारतों का सर्वे पूरा कर लिया है, जिसमें करीब 24,000 छात्र और नौकरीपेशा लोग रहते हैं। खासतौर पर 5 मंजिल से अधिक ऊंची RCC संरचना वाली और 4 मंजिल से अधिक ईंट की दीवारों वाली इमारतों का विशेष सर्वे किया जा रहा है। अधिकारियों को 10 सितंबर 2026 तक इस सर्वे का कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह के हादसे से बचा जा सके।











