दिल्ली के मालवीय नगर में भीषण आग का दर्दनाक हादसा
दिल्ली के मालवीय नगर क्षेत्र की हौज रानी की संकरी गलियों में स्थित ‘फ्लरिश स्टे’ होटल अब राख का ढेर बन चुका है। यह होटल पहले आरामदायक और किफायती रहने का विकल्प माना जाता था, लेकिन अब यह देश की सबसे खतरनाक अग्निकांडों में से एक का प्रतीक बन गया है।
अधिकारियों की लापरवाही और सुरक्षा खामियों का खुलासा
दिल्ली सरकार की ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ (B&B Scheme) के तहत इस होटल को केवल छह कमरों के संचालन की अनुमति मिली थी, लेकिन वहां करीब 25 कमरे चल रहे थे। बुधवार सुबह लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। जांच में पता चला है कि होटल में ठहरे लोग मौत के जाल में फंस गए थे।
आग लगने का कारण और प्रभावित लोग
होटल ने अपने एयरबीएनबी (Airbnb) प्रोफाइल और सोशल मीडिया पर अपने प्रमोशन में मैक्स अस्पताल (Max Hospital) से नजदीकी का दावा किया था। इंस्टाग्राम पर ‘Affordable Stay’, ‘Cozy Comfort’ और ‘Proximity to Max Hospital Saket’ जैसे वादे किए गए थे। स्थानीय निवासियों के अनुसार, अधिकतर मेहमान मरीज और उनके परिजन थे, जो साकेत (Saket) स्थित मैक्स अस्पताल में इलाज के लिए दिल्ली आए थे।
यह होटल मैक्स अस्पताल से महज 100 मीटर की दूरी पर था, इसलिए विदेशी नागरिक भी यहां रुकते थे। होटल की वेबसाइट पर सुविधाओं में सेल्फ-कुकिंग, नजदीकी मेट्रो स्टेशन और सेलेक्ट सिटीवॉक मॉल का उल्लेख था, लेकिन इन दावों के विपरीत, इमारत में फायर एनओसी (Fire NOC) की कोई वैध अनुमति नहीं थी। आग लगने के दौरान, वही खिड़की, जो मैक्स अस्पताल का दृश्य दिखाकर ग्राहकों को आकर्षित करती थी, जान बचाने का आखिरी रास्ता बन गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई मेडिकल टूरिस्ट और मेहमानों ने आग से बचने के लिए दूसरी और तीसरी मंजिल से छलांग लगाई। अस्पताल ने भी अपने बयान में कहा है कि कई घायलों को अस्पताल लाया गया, जिनमें से कुछ ने दूसरी और तीसरी मंजिल से कूदने के कारण फ्रैक्चर का सामना किया। स्थानीय लोगों ने आग लगते ही नीचे गद्दे बिछाए और रस्सियां फेंककर लोगों को बचाने का प्रयास किया। हालांकि, बेसमेंट में अवैध रूप से बने कमरों में फंसे मेहमानों को बच निकलने का मौका नहीं मिला। इनमें से कुछ की मौत झुलसने से हुई, जबकि अधिकांश की जान दम घुटने के कारण चली गई।
हादसे के तुरंत बाद राहत और बचाव दल को संकरी गलियों में पहुंचने में काफी कठिनाई हुई। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में लगी हैं कि बिना फायर एनओसी और सुरक्षा इंतजामों के यह होटल वर्षों तक कैसे संचालित होता रहा। यह हादसा दिल्ली में फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है। इस दुर्घटना में मृतकों में छह विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जो नाइजीरिया, लाइबेरिया, मोजाम्बिक और बांग्लादेश से थे। इसके अलावा, नौ भारतीय नागरिकों की भी मौत हुई है, जबकि छह शवों की पहचान अभी नहीं हो सकी है।










