कंझावला हादसे का दर्दनाक सच और पीड़ित परिवार की स्थिति
1 जनवरी 2023 की रात जब पूरा देश नए साल का जश्न मना रहा था, उसी समय दिल्ली के कंझावला क्षेत्र में एक भयावह घटना हुई। एक लड़की अपने घर से नई गुलाबी जैकेट पहनकर निकली थी, लेकिन उसकी किस्मत ने उसे सड़क पर ही मौत के घाट उतार दिया। वह लड़की कार के पहियों के नीचे आ गई और करीब 13 किलोमीटर तक घसीटी जाती रही, जब तक कि उसकी जान नहीं चली गई। यह घटना पूरे देश में सनसनी फैलाने वाली बन गई और इसे कंझावला कांड के नाम से जाना गया।
परिवार की जद्दोजहद और न्याय की उम्मीदें
कंझावला केस में पीड़ित परिवार की स्थिति अभी भी अत्यंत दुखद है। घर का पता बदलने के बावजूद उनकी पहचान वही रही, और मृत बेटी की यादें उनके दिलों में ताजा हैं। करण विहार से शिफ्ट होकर अब वे मंगोलपुरी के एक छोटे से कमरे में रहते हैं, जहां उनके पास न तो बहुत सुविधाएं हैं और न ही कोई स्थिरता। मां रेखा का कहना है कि उनकी बेटी अंजलि का सपना था कि वह वेडिंग प्लानर बने, लेकिन हादसे ने उनके जीवन का सपना चूर-चूर कर दिया। अब भी वह हफ्ते में तीन बार डायलिसिस कराती हैं, लेकिन फ्री इलाज बंद हो चुका है।
हादसे का पूरा घटनाक्रम और न्यायिक प्रक्रिया
कंझावला हादसे में शामिल चारों आरोपियों पर हत्या का मामला दर्ज किया गया है। घटना के वक्त आरोपी कार सवार युवकों ने जानबूझकर लड़की को टक्कर मारी और फिर उसे घसीटते हुए भाग गए। पुलिस ने तीन महीने के भीतर 800 पेज की चार्जशीट दाखिल की और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। अभी मामला रोहिणी कोर्ट में चल रहा है। पीड़ित परिवार को अक्टूबर में 36.69 लाख रुपये का मुआवजा भी मिला है, लेकिन उनके लिए यह रकम अभी भी बहुत कम है। मां का कहना है कि इस पैसे से वे अपने इलाज और बच्चों की देखभाल कर पाएंगे, क्योंकि उनके जीवन का एकमात्र मकसद है अपने बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ देखना।











