दिल्ली में जाति आधारित आरक्षण और यूजीसी नियमों का विरोध
शुक्रवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों सामान्य वर्ग के नागरिकों ने जाति आधारित आरक्षण में सुधार और यूजीसी (UGC) के नए इक्विटी नियमों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में भाग लेने वालों ने इन नियमों का विरोध करते हुए सरकार से बदलाव की मांग की। कुछ प्रदर्शनकारियों ने साथ ही एससी/एसटी एक्ट का भी विरोध किया और इसे वापस लेने की आवाज उठाई।
प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी के स्थगित किए गए नए नियमों के खिलाफ नारे लगाए और सरकार से इस मुद्दे पर शीघ्र कदम उठाने का आग्रह किया। भारतीय किसान परिषद के राष्ट्रीय सचिव सुधीर चौहान ने कहा कि इन नियमों को वापस लेना जरूरी है, क्योंकि ये छात्रों के बीच भेदभाव और द्वेष को बढ़ावा देते हैं।
आर्थिक आधार पर मदद और आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के युवा राष्ट्रीय सचिव दीपराज रावल ने कहा कि सरकार को यह तय करते समय जाति की बजाय आर्थिक स्थिति को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि गरीब व्यक्ति चाहे किसी भी जाति का हो, उसे शिक्षा, कोचिंग और अन्य आवश्यकताओं के लिए सहायता मिलनी चाहिए।
एक अन्य प्रदर्शनकारी ने मौजूदा आरक्षण प्रणाली की समीक्षा की आवश्यकता पर बल दिया। उनका तर्क था कि कई बार आरक्षण का लाभ उन तक नहीं पहुंच पाता जो समाज में सबसे अधिक वंचित हैं। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मौजूदा व्यवस्था अपने उद्देश्य को पूरा कर रही है या नहीं और क्या इसका लाभ जमीनी स्तर पर सही ढंग से पहुंच रहा है।
क्रीमी लेयर और नीतियों में बदलाव की मांग
कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ प्रावधान लागू करने और अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) तथा अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से जुड़ी नीतियों में बदलाव की मांग की। यूएस राणा ने कहा कि उनका मकसद आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को सरकारी सहायता से वंचित करना नहीं है, बल्कि सहायता उन लोगों तक पहुंचनी चाहिए जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है। इसके तहत स्कॉलरशिप, फीस में मदद और कोचिंग जैसी सुविधाएं आर्थिक जरूरत के आधार पर दी जानी चाहिए।
नितिन चौहान ने कहा कि आरक्षण लागू हुए कई दशक बीत चुके हैं और अब समय है कि सामाजिक और आर्थिक बदलावों को ध्यान में रखते हुए इसकी समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में बदलाव जरूरी है ताकि आर्थिक पिछड़ेपन को बिना किसी भेदभाव के दूर किया जा सके।
प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया और ‘सियावर रामचंद्र की जय’ के नारे लगाए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखते नजर आए। आयोजकों का कहना था कि यह प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण है और किसी भी तरह की हिंसा का कोई इरादा नहीं है।
दिल्ली पुलिस ने शुरुआत में इस प्रदर्शन की अनुमति को लेकर संशय जताया था, लेकिन बाद में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति दे दी गई। सुरक्षा के मद्देनजर इलाके में बैरिकेड लगाए गए थे और पुलिस के साथ-साथ RAF (Rapid Action Force) और ITBP ( Indo-Tibetan Border Police) के जवान भी तैनात रहे। पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी गई और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया।
देशभर में चल रहे आरक्षण और यूजीसी नियमों के विरोध प्रदर्शन
आरक्षण में सुधार और यूजीसी इक्विटी नियमों के खिलाफ विरोध का अभियान पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया से निकलकर सड़कों पर भी पहुंच चुका है। नागपुर, लखनऊ, जयपुर और विशाखापत्तनम जैसे शहरों में भी इस मुद्दे पर प्रदर्शन हुए हैं। राजस्थान में श्री राजपूत करणी सेना ने 24 दिनों तक लगभग 800 किलोमीटर की पदयात्रा की, जिसमें कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुईं।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से अपनी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो यह आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और अधिक आंदोलन की संभावना जताई जा रही है।











