बरगी डैम पर हुई भयावह नाव दुर्घटना का पूरा घटनाक्रम
बरगी डैम (Barghi Dam) की शांत शाम अचानक त्रासदी में बदल गई, जब नर्मदा नदी (Narmada River) की सुंदर लहरें और सूरज की सुनहरी किरणें वातावरण को आकर्षक बना रही थीं। उस समय क्रूज पर सवार लोग अपने परिवार के साथ इस खूबसूरत पल का आनंद ले रहे थे। हवा में ठंडक और माहौल में सुकून था, और सभी अपने कैमरों में इन यादगार क्षणों को कैद कर रहे थे। लेकिन कुछ ही मिनटों में यह सुखद शाम मौत की खामोशी और चीखों में बदल गई।
परिवार की खुशियों का पल त्रासदी में बदल गया
जबलपुर (Jabalpur) की खजान बस्ती में रहने वाले प्रदीप और उनका परिवार भी इसी आनंदमय शाम का हिस्सा था। परिवार जबलपुर के एक रिश्तेदार के गृह प्रवेश समारोह में शामिल होने गया था। इसमें पत्नी, बेटा, बेटी, सास और अन्य परिजन भी थे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद सभी ने बरगी डैम घूमने का फैसला किया। किसी को भी नहीं पता था कि यह यात्रा उनके जीवन की सबसे बड़ी आपदा बन जाएगी। मृतक की छोटी बहन ने बताया कि उस वक्त उसकी बड़ी बहन ने फोन किया था और कहा था कि वे डूब रहे हैं, उन्हें बचाओ। कुछ ही देर में मौत की खबर आई और पूरा परिवार सदमे में आ गया। मृतका की बहन ने बताया कि उनके परिवार के सदस्य एक फैमिली फंक्शन में गए थे और तभी यह हादसा हुआ।
हादसे का पूरा घटनाक्रम और बचाव कार्य
परिवार के सदस्य क्रूज पर सवार होते समय उत्साह से भरपूर थे। प्रदीप की पत्नी मुस्कुरा रही थीं, बेटा डेक पर दौड़ रहा था, बेटी मोबाइल से वीडियो बना रही थी और परिवार सेल्फी ले रहा था। नर्मदा की लहरों के बीच यह शाम हर किसी के लिए यादगार बन रही थी। लेकिन अचानक तेज हवाओं ने माहौल बदल दिया। पानी में उफान आने लगा और स्थिति भयावह हो गई। कुछ ने वीडियो बनाया, तो कुछ हंसकर इस स्थिति को टालने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन कुछ ही पलों में यह सुखद माहौल डर और आतंक में बदल गया।
हादसे के दौरान प्रदीप ने अपनी पत्नी और बेटे को फोन किया, जिसमें घबराई आवाज़ में कहा गया कि हम डूब रहे हैं, हमें बचाओ। यह सुनकर दिल्ली में बैठे परिवार के सदस्य हक्के-बक्के रह गए। उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ कि कुछ मिनट पहले जो लोग हंसते-खेलते वीडियो भेज रहे थे, अब जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे हैं। प्रदीप ने बताया कि जैसे ही उन्होंने लाइफ जैकेट उठाई, क्रूज अचानक एक तरफ झुक गया। लोग चीखने लगे, बच्चे रोने लगे और अफरा-तफरी मच गई। महज तीन मिनट में स्थिति पूरी तरह बदल गई। क्रूज पानी में डूबने लगा और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
रातभर बरगी डैम के किनारे बचाव अभियान चलता रहा। पुलिस, एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और सेना की टीमें मौके पर पहुंचीं। तेज रोशनी में हर कोई अपने प्रियजनों की खोज में लगा था, लेकिन अंधेरा इतना घना था कि कई बार अभियान रोकना पड़ा। परिजनों के लिए हर मिनट एक युग जैसा था। कुछ लोग हाथ जोड़कर प्रार्थना कर रहे थे, तो कई नर्मदा की लहरों को टकटकी लगाए देख रहे थे। सुबह जब रेस्क्यू शुरू हुआ, तो एक महिला और बच्चे का शव मिला। मृतक की मां अपने बेटे को मौत के बाद भी अपने सीने से लगाए हुए थी। प्रदीप ने अपनी पत्नी और बेटे को देखकर फफककर रो पड़े, और वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
हादसे के बाद कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। मौसम विभाग ने तेज हवाओं का येलो अलर्ट जारी किया था, फिर भी क्रूज को नर्मदा में उतारा गया। यात्रियों का आरोप है कि लाइफ जैकेट समय पर उपलब्ध नहीं कराई गईं। जैसे ही खतरा बढ़ा, अफरा-तफरी मच गई और कई लोग केबिन में फंस गए। इन लापरवाहियों का खामियाजा कई जिंदगियों को भुगतना पड़ा। हादसे के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की, जिसमें क्रूज चालक, हेल्पर और टिकट काउंटर प्रभारी को बर्खास्त किया गया। मुख्यमंत्री ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश भी दिए हैं। लेकिन सवाल वही है कि क्या ये कार्रवाई उन मासूम जिंदगियों को वापस ला सकती है।









