कूनो नेशनल पार्क में प्रोजेक्ट चीता का प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है
मध्य प्रदेश (MP) के श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में ‘प्रोजेक्ट चीता’ का सकारात्मक प्रभाव अब पूरे जंगल क्षेत्र में साफ नजर आ रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य केवल चीते ही नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को पुनः जीवंत बनाना था। आज के समय में इसके परिणाम आश्चर्यजनक रूप से प्रभावशाली साबित हो रहे हैं।
जंगल में दुर्लभ वन्य जीवों की उपस्थिति में हुई वृद्धि
हाल ही में किए गए एक कैमरा ट्रैप सर्वे में कूनो के जंगलों में अत्यंत दुर्लभ माने जाने वाले जंगली बिल्ली या स्याहगोश (Caracal) की मौजूदगी दर्ज की गई है। यह पहली बार है जब दशकों बाद इस जीव की तस्वीरें कैमरे में कैद हुई हैं, जो इस बात का संकेत है कि यह जीव फिर से जंगल में लौट रहा है।
प्राकृतिक आवास में बदलाव और नई प्रजातियों का आगमन
कूनो में पहली बार जंगली उल्लू, जंगली कुत्ता और भारतीय भेड़ियों जैसी प्रजातियों की उपस्थिति देखी गई है। खास बात यह है कि दिसंबर 2025 से यह दुर्लभ उल्लू कूनो के जंगलों में नियमित रूप से देखा जा रहा है। इसके साथ ही, जंगली कुत्तों की मौजूदगी भी पहली बार दर्ज हुई है, जो कूनो की पारिस्थितिकी में सुधार का संकेत है। पहले गर्मियों में भेड़िए पानी और भोजन की कमी के कारण पलायन कर जाते थे, लेकिन अब बेहतर पर्यावरणीय प्रबंधन के चलते वे स्थायी रूप से यहां रहने लगे हैं।
कूनो के इस अभूतपूर्व परिवर्तन के पीछे वन विभाग की आधुनिक जल प्रबंधन नीति है। पथरीले और ऊंचे इलाकों में पानी की कमी के कारण वन्यजीव गर्मियों में पलायन कर जाते थे, लेकिन अब कूनो नदी का पानी पहुंचने से स्थिति बदल गई है। इसके लिए सोलर पंप जैसी नई तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे गर्मियों में भी पानी की आपूर्ति निरंतर बनी रहती है।
आज कूनो का दृश्य पूरी तरह से बदल चुका है। मवेशियों की घंटियों की आवाज की जगह अब पक्षियों की मधुर चहचहाहट और वन्यजीवों की पुकारें सुनाई देती हैं। शाम होते ही जंगल में चीतलों की लंबी कतारें निकलती हैं और सांभर तालाबों के किनारे शांत खड़े दिखाई देते हैं। नीलगाय और तेंदुए अब पानी की तलाश में भटकने के बजाय कूनो के इस हरियाली भरे जंगल को अपना स्थायी घर मानकर तालाबों के आसपास आराम से घूमते नजर आते हैं।











