ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया से जुड़े फर्जी दस्तावेज विवाद बढ़ता जा रहा है
ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (DFI) से संबंधित कथित फर्जीवाड़े के मामले में विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस संदर्भ में अब केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) ने नई शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) (Directorate General of Civil Aviation), नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) और कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) के कुछ अधिकारियों पर भ्रष्टाचार, नियमों का उल्लंघन और मिलीभगत का आरोप लगाया गया है।
शिकायत में आरोप और जांच की प्रक्रिया
यह ताजा शिकायत RTI कार्यकर्ता तेजप्रताप सिंह ने दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि जांच के दौरान यह स्पष्ट होने के बावजूद कि ड्रोन फेडरेशन ने नाम बदलने के लिए फर्जी सरकारी दस्तावेजों का प्रयोग किया था, संबंधित अधिकारियों ने कोई कठोर कदम नहीं उठाए। सीवीसी ने इस शिकायत को आगे की जांच के लिए 3 अगस्त को कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) के पास भेज दिया है।
2023 का फर्जीवाड़ा मामला और जांच का इतिहास
यह विवाद वर्ष 2023 का है, जब डीएफआई ने अपने संगठन का नाम ड्रोन फेडरेशन इंडिया से बदलकर ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया करने के लिए आवेदन किया था। नियमों के अनुसार, नाम परिवर्तन के लिए सरकार से अनुमति लेना आवश्यक है। आरोप है कि जब कॉरपोरेट मामलों के रजिस्ट्रार ने इस पर आपत्ति जताई, तो डीएफआई ने एक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्रस्तुत किया। यह एनओसी डीजीसीए के तत्कालीन महानिदेशक अरुण कुमार के हस्ताक्षर से जारी होने का दावा किया गया था।
जांच में पता चला कि यह दस्तावेज पूरी तरह से फर्जी था। मंत्रालय की जांच में यह भी सामने आया कि उस एनओसी को जारी ही नहीं किया गया था, और फाइल नंबर भी नकली था। आश्चर्य की बात यह है कि उस तारीख का वह कागज, जब वह जारी किया गया था, उससे पहले ही अरुण कुमार का ट्रांसफर हो चुका था। शिकायतकर्ता का कहना है कि इतने बड़े खुलासे के बाद भी संबंधित अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। अब इस नई शिकायत के बाद यह देखना बाकी है कि जांच एजेंसियां आगे क्या कदम उठाती हैं।










