यमुना बाढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण और सरकारी कार्रवाई
उत्तर दिल्ली के कश्मीरी गेट स्थित यमुना बाजार क्षेत्र में, जो यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र के अंतर्गत आता है, किसी भी प्रकार का अतिक्रमण प्रतिबंधित है। दिल्ली सरकार ने जानकारी दी है कि समय के साथ यहां घाटों पर लगातार अवैध कब्जे होते रहे हैं। इस क्षेत्र में कुल 32 घाट हैं, जहां लगभग 1100 निवासी रहते हैं और करीब 310 आवासीय संरचनाएं मौजूद हैं।
दिल्ली सरकार और एनजीटी की कार्रवाई
कुछ दिनों पहले दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (डीडीएमए) ने इन अवैध कब्जों को हटाने के लिए 26 नोटिस जारी किए हैं, जिसमें निवासियों से 15 दिनों के भीतर क्षेत्र खाली करने को कहा गया है। वहीं, दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह जमीन दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (डीडीए) की है और यहां किसी भी तरह का निर्माण कार्य पूरी तरह से प्रतिबंधित है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने भी डीडीए को निर्देश दिया है कि यमुना के बाढ़ क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ आवश्यक कदम उठाए जाएं।
बाढ़ और अतिक्रमण का मानव जीवन पर प्रभाव
डिजिटल रिपोर्ट्स के अनुसार, डीडीए ने पिछले वर्षों में इस क्षेत्र में कई अभियान चलाए हैं, जिनमें रेजिडेंशियल और व्यावसायिक उपयोग के लिए भूमि को खाली कराया गया है। सरकार ने यह भी बताया कि यमुना नदी की बाढ़ के दौरान यह क्षेत्र लगभग हर साल जलमग्न हो जाता है, विशेष रूप से 2023 और 2025 की बाढ़ के समय। इन बाढ़ की घटनाओं से मानव जीवन, पशुधन और संपत्ति को गंभीर खतरा रहता है, जो आपातकालीन उपायों और संसाधनों की आवश्यकता को बढ़ाता है।









