सुप्रीम कोर्ट का दिल्ली की बिजली कंपनियों के CAG ऑडिट पर बड़ा फैसला
दिल्ली की बिजली वितरण कंपनियों के खिलाफ नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा ऑडिट कराने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी ने इस मामले में नई उम्मीदें जगा दी हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि CAG द्वारा इन कंपनियों का ऑडिट करने के लिए नियुक्ति का निर्णय लेने का अधिकार प्राधिकरण tribunal (APTEL) को नहीं था। इस फैसले को बिजली उपभोक्ताओं के हित में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
ऑडिट का तरीका और निजी संस्थानों का संदर्भ
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इतनी कठोर और व्यापक ऑडिट किसी निजी संस्था के माध्यम से कराना संभव नहीं है। कोर्ट की इन टिप्पणियों को दिल्ली की बिजली कंपनियों की CAG ऑडिट की मांग के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से अब सरकार और नियामक एजेंसियों के बीच ऑडिट प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता आएगी।
रेगुलेटरी एसेट्स और जनता का हित
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि रेगुलेटरी एसेट्स का लिक्विडेशन और ऑडिट का मामला आपस में गहराई से जुड़ा हुआ है। यह मुद्दा बिजली उपभोक्ताओं पर सीधा प्रभाव डालता है और इसमें हजारों करोड़ रुपये का निवेश शामिल है। दिल्ली सरकार के पावर मंत्री आशीष सूद ने इस फैसले को दिल्ली की जनता की जीत बताया और कहा कि लंबे समय से बीजेपी सरकार इस ऑडिट की मांग कर रही थी।
उन्होंने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी की पिछली सरकार इन कंपनियों का ऑडिट नहीं कराना चाहती थी, लेकिन बीजेपी ने जनता से वादा किया था। अब उम्मीद है कि CAG का ऑडिट होगा, जिससे उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा और बिजली कंपनियों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
वहीं, पावर एक्सपर्ट वीएस वोहरा ने जोर देकर कहा कि यह ऑडिट CAG द्वारा ही किया जाना चाहिए, न कि किसी निजी संस्था के माध्यम से। उनका मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह पहली टिप्पणी इस मामले में बहुत ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ हिसाब-किताब का मामला नहीं है, बल्कि जनता के पैसे और उपभोक्ता हित से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है, जिसे अब सही दिशा मिलेगी।










