दिल्ली में बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी, परियोजनाओं को मिली मंजूरी
दिल्ली में लंबे समय से विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाएं अटकी हुई थीं, लेकिन अब इन परियोजनाओं को नई गति मिल रही है। अधिकारियों के अनुसार, उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की समीक्षा के बाद कई प्रमुख परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन को स्वीकृति दी गई है। इनमें सबसे प्रमुख परियोजना होलंबी कलां में देश का पहला इलेक्ट्रॉनिक कचरा प्रबंधन और ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग पार्क स्थापित करने की योजना है।
प्रमुख परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन और पर्यावरणीय मानकों का ध्यान
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने इस परियोजना के लिए 8.5 हेक्टेयर भूमि आवंटित की है, जिसे अत्याधुनिक और प्रदूषण मुक्त तकनीकों के साथ विकसित किया जाएगा। इस पार्क का मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान और ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही, गाजीपुर लैंडफिल साइट पर 10 एकड़ भूमि नगर निगम (एमसीडी) को दी गई है ताकि कचरा प्रबंधन को मजबूत किया जा सके। इसके अतिरिक्त, वेस्ट-टू-एनर्जी और बायो-मीथेनाइजेशन संयंत्रों के विस्तार के लिए 10.4 एकड़ अतिरिक्त भूमि भी आवंटित की गई है। एमसीडी को 24 फिक्स्ड कॉम्पैक्टर ट्रांसफर स्टेशन स्थापित करने के लिए भी जमीन दी गई है।
संबंधित परियोजनाएं और सुरक्षा व परिवहन के लिए भूमि आवंटन
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए दिलकुशा बाग, सागरपुर, सूरजपुर और किशनगढ़ में नए पुलिस थाने, नरेला में फोरेंसिक साइंस लैब और धीरपुर तथा ताहिरपुर में इंटेलिजेंस ब्यूरो के कार्यालयों के लिए भी भूमि आवंटित की गई है। परिवहन क्षेत्र में दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) को सनौठ में मेट्रो डिपो के लिए 20 हेक्टेयर और नरेला में कास्टिंग यार्ड के लिए 16 हेक्टेयर भूमि दी गई है। जलापूर्ति व्यवस्था सुधारने के लिए दिल्ली जल बोर्ड को 151 बोरवेल लगाने की अनुमति मिली है। इसके अलावा, आठ स्थानों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), सीवेज पंपिंग स्टेशन, जौंटी में STP और संगम विहार में भूमिगत जलाशय के लिए भी भूमि आवंटित की गई है।









