दिल्ली में होटल आग का भयावह हादसा: परिवार की जिंदगी बदल गई
3 जून की सुबह सामया के लिए कभी न भूलने वाली घटना बन गई। वह अपने परिवार के साथ बांग्लादेश (Bangladesh) से दिल्ली आई थीं, ताकि उनका इलाज हो सके। उम्मीद थी कि मैक्स अस्पताल (Max Hospital) में उपचार से सब ठीक हो जाएगा। लेकिन इससे पहले कि वे अस्पताल पहुंचते, एक होटल में हुई भीषण आग ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी।
होटल में लगी भीषण आग और परिवार का संघर्ष
सामया अपने पांच सदस्यों के साथ दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर (Malviya Nagar) स्थित एक होटल में ठहरी थीं। 2 जून को चौथी मंजिल पर दो कमरे बुक किए गए थे। यात्रा की थकान के कारण सभी जल्दी सो गए थे, क्योंकि अगले दिन अस्पताल जाना था। लेकिन 3 जून की सुबह अचानक एक त्रासदी में बदल गई। होटल में अचानक अफरा-तफरी मच गई। लोग चिल्लाने लगे, भागने लगे और दरवाजे पीटने लगे। कुछ ही समय में कमरे में धुआं भर गया, जिससे सांस लेना मुश्किल हो गया। सामया याद करती हैं कि उन्होंने अपने परिजनों को आवाज दी, लेकिन हालात तेजी से बिगड़ रहे थे। पूरे मंजिल पर धुआं छाया हुआ था, और सांस लेने में कठिनाई हो रही थी। उसके बाद का घटनाक्रम उन्हें याद नहीं, और आज भी उनकी आवाज कांप जाती है।
आग में परिवार के दो सदस्य खोने का दर्द और आर्थिक संघर्ष
बाद में पता चला कि सामया बेहोश हो गई थीं। दमकलकर्मियों और पुलिस की टीम ने उन्हें और उनके परिवार के अन्य सदस्यों को बाहर निकाला। जब वह होश में आईं, तो अस्पताल में थीं। लेकिन वहां उन्हें एक ऐसा सच भी पता चला, जिसने उनके जीवन को हिला कर रख दिया। उनके दो प्रिय सदस्य इस हादसे में जान गंवा चुके थे। आग और धुएं ने उनके परिवार से उनके प्रियजनों को छीन लिया।
यह परिवार बांग्लादेश से दिल्ली इलाज कराने आया था, लेकिन हादसे के बाद उनके दो सदस्यों का शव लेकर लौटना पड़ा। सामया बताती हैं कि अस्पताल में कई दिन भर्ती रहने के बाद उनके शारीरिक घाव तो भर गए, लेकिन दिल के जख्म आज भी ताजा हैं। रात को जब वह आंखें बंद करती हैं, तो वही धुआं फिर से दिखाई देता है, मानो सब कुछ फिर से हो रहा हो।
हादसे के बाद परिवार को एक और कठिनाई का सामना करना पड़ा। सामया का आरोप है कि उनके दो परिजनों के शवों को बांग्लादेश (Bangladesh) ले जाने के लिए उन्हें भारी रकम खर्च करनी पड़ी। उन्हें उम्मीद थी कि सरकार या प्रशासन से मदद मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने बहुत पैसा खर्च किया, और कहा गया कि मदद मिलेगी, लेकिन उन्हें खुद ही सब इंतजाम करने पड़े।
मालवीय नगर (Malviya Nagar) में हुए इस होटल अग्निकांड के कई दिन बीत चुके हैं। अब होटल के कमरे खाली हैं और धुएं की गंध भी शायद खत्म हो गई है। लेकिन सामया के लिए वह आग अभी भी बुझी नहीं है। वह हर रात उस सुबह को फिर से जीती हैं, जब उन्होंने अपने इलाज की उम्मीद में होटल में ठहरा था। कैसे अचानक धुआं भर गया, कैसे सब बेहोश हो गए, और होश आने पर पता चला कि उनके दो प्रियजन हमेशा के लिए चले गए। दिल्ली की उस सुबह ने न केवल एक होटल को जला दिया, बल्कि एक परिवार के सपनों, उम्मीदों और खुशियों को भी राख कर दिया।











