दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में पड़े हैं करोड़ों के मेडिकल उपकरण
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक चौंकाने वाली रिपोर्ट पर गंभीर टिप्पणी की, जिसमें बताया गया कि दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में लगभग 50 से 60 करोड़ रुपये की लागत वाले आयातित मेडिकल उपकरण बेकार पड़े हैं। इन उपकरणों का उपयोग क्यों नहीं हो रहा, इसकी मुख्य वजह मैनपावर की कमी और आवश्यक एक्सेसरीज का अभाव है।
यह मामला विशेष रूप से दिल्ली के अस्पतालों में वेंटिलेटर और आईसीयू बेड की उपलब्धता तथा इमरजेंसी हेल्पलाइन के संचालन से जुड़ा था। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन उपकरणों को संचालित करने के लिए पर्याप्त स्टाफ की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जिन मशीनों का उपयोग नहीं हो रहा, उन्हें उन अस्पतालों में भेजा जाए जहां उनकी सबसे अधिक जरूरत है। साथ ही, जिन उपकरणों या एक्सेसरीज की कमी है, उन्हें तुरंत उपलब्ध कराया जाए।
मेडिकल उपकरणों की स्थिति और सरकारी अस्पतालों का हाल
दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष पेश हलफनामे से पता चला कि दिल्ली के कई सरकारी अस्पतालों में करोड़ों रुपये की लागत से खरीदे गए मेडिकल उपकरण बेकार पड़े हैं। इनमें कोविड के दौरान खरीदी गई मशीनें, काम न करने वाले सिस्टम और स्टाफ की कमी के कारण उपयोग में नहीं आ रहे उपकरण शामिल हैं। इन अस्पतालों ने अपनी स्थिति की जानकारी कोर्ट को दी है, जिसमें बताया गया कि सैकड़ों मशीनें अभी भी इस्तेमाल के योग्य नहीं हैं।
विशेष रूप से दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में रखे गए उपकरणों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। यहाँ 2016 में खरीदी गई मेडिकल साइक्लोट्रॉन मशीन, जो पीईटी स्कैन के लिए जरूरी एफडीजी बनाती है, वर्ष 2022 से बंद पड़ी है। इस मशीन का उपयोग मरीजों के पीईटी स्कैन के दौरान जरूरी रेडियोफार्मास्यूटिकल बनाने के लिए किया जाता है। मशीन के लंबे समय से बंद रहने के कारण, इस सुविधा का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।
मेडिकल उपकरणों की खरीद और रखरखाव में हुई अनियमितताएं
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री ने इस पूरे मामले में कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार ने करोड़ों रुपये की लागत से कई मेडिकल मशीनें खरीदी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार इन उपकरणों का उपयोग सुनिश्चित करने के लिए जांच कर रही है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि अस्पतालों में स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए भर्ती प्रक्रिया तेज की गई है।
मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि सरकार जल्द ही पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत 24 घंटे सीटी स्कैन, एमआरआई और अल्ट्रासाउंड जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराएगी। 2024 में दर्ज एंटी करप्शन ब्रांच के मामलों का भी जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जांच में कई अनियमितताएं सामने आई हैं और संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच, आजतक संवाददाता ने दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों का दौरा कर इन उपकरणों की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। रिपोर्ट में पाया गया कि कई उपकरण वर्षों से बंद पड़े हैं, जिनमें से कुछ का उपयोग कोविड महामारी के दौरान किया गया था। इन उपकरणों की खराब स्थिति और स्टाफ की कमी के कारण इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है।










