दिल्ली में भीषण गर्मी और नमी का प्रभाव
दिल्ली में 28 जून को हीट इंडेक्स ने 51.3 डिग्री सेल्सियस का रिकॉर्ड बनाया, जबकि वास्तविक तापमान केवल 41.3 डिग्री था। इस असामान्य अंतर का मुख्य कारण हवा में मौजूद अत्यधिक नमी है। जब वातावरण में नमी अधिक होती है, तो शरीर का पसीना सही से नहीं सूख पाता, जिससे शरीर को ठंडा करने की प्रक्रिया बाधित हो जाती है। वेट-बल्ब तापमान, जो शरीर की ठंडक बनाए रखने की क्षमता को दर्शाता है, 29.77 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो खतरनाक सीमा के बहुत करीब है।
वेट-बल्ब तापमान और नमी का प्रभाव
शरीर अपने तापमान को नियंत्रित करने के लिए पसीने का सहारा लेता है। पसीना त्वचा पर आता है, हवा में उड़ता है और गर्मी को बाहर निकालता है। यह प्रक्रिया तभी प्रभावी होती है जब आसपास की हवा सूखी हो। वैज्ञानिक इस ठंडक देने वाली क्षमता को मापने के लिए वेट-बल्ब तापमान का प्रयोग करते हैं। इसके लिए एक गीले कपड़े को थर्मामीटर से ढककर हवा फेंकी जाती है। सूखी हवा में यह तापमान तेजी से गिरता है, जबकि नम हवा में यह बहुत कम परिवर्तन करता है, क्योंकि पहले से ही हवा में पर्याप्त पानी मौजूद होता है।
दिल्ली में बढ़ती गर्मी और नमी का खतरा
शनिवार को दिल्ली का वेट-बल्ब तापमान 29.77 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सुनने में कम लग सकता है, लेकिन यह बहुत खतरनाक है। सामान्यतः 32 डिग्री पर एक सामान्य व्यक्ति भी बाहर अधिक देर तक काम नहीं कर सकता। 35 डिग्री पर पसीना प्रभावी रूप से काम करना बंद कर देता है, और शरीर खुद को ठंडा नहीं रख पाता। इस तरह दिल्ली धीरे-धीरे उस खतरनाक सीमा के करीब पहुंच रही है।
मौसम का वर्तमान और आने वाले बदलाव
स्कायमेट वेदर के वाइस प्रेजिडेंट महेश पलावत के अनुसार, अरब सागर से आ रही हवाएं उत्तर-पश्चिम भारत में नमी ला रही हैं। सामान्यतः बंगाल की खाड़ी से आने वाला मानसून अभी भी दूर है। दिल्ली की गर्मी इस बार गीली हो गई है, जो जानलेवा साबित हो सकती है। मौसम विभाग का अनुमान है कि सोमवार के बाद तापमान में गिरावट आएगी। अगले हफ्ते बारिश, तेज हवाएं और गरज-चमक के साथ मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। शुक्रवार तक रातें भी ठंडी होकर करीब 22 डिग्री तक पहुंच सकती हैं, और 4 जुलाई के बाद मानसून की संभावना है। इस बीच, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि असली समस्या गर्मी नहीं, बल्कि नमी है।










