दिल्ली जिमखाना क्लब पर सरकारी कार्रवाई का विवाद
केंद्र सरकार ने मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट में स्पष्ट किया कि वह दिल्ली जिमखाना क्लब के परिसर पर जबरदस्ती कब्जा नहीं करेगी। यदि क्लब 5 जून तक अपनी जमीन खाली करने में असमर्थ रहता है, तो सरकार कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए आवश्यक कदम उठाएगी।
सरकार ने यह भी बताया कि जिमखाना क्लब पर लगभग 48 करोड़ रुपये का बकाया है, जिसके कारण उसे तीन नोटिस भेजे गए हैं। इस विवादित जमीन को लेकर सरकार का कहना है कि यह सार्वजनिक सुरक्षा और रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए जरूरी है।
कब और कैसे होगी जमीन की वापसी?
मेहता ने कहा कि सरकार कानून के अनुसार ही कब्जा करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि 5 जून वह अंतिम तारीख है जब क्लब को अपनी जगह स्वयं खाली करने का विकल्प दिया गया है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि यदि क्लब ऐसा नहीं करता है, तो पुलिस तुरंत कार्रवाई नहीं करेगी। बल्कि, कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा, जिसमें उचित नोटिस और कानूनी कदम शामिल हैं।
अदालत ने इस मामले में पूछा कि क्या वह केंद्र सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड कर सकती है, जिस पर मेहता ने सहमति दी। साथ ही, अदालत ने यह भी कहा कि भले ही जमीन ली जाए, क्लब की सदस्यता बनी रहेगी, क्योंकि वे पट्टेदार नहीं हैं।
मेहता ने यह भी आश्वासन दिया कि दिल्ली जिमखाना को उसके परिसर के लिए कोई वैकल्पिक स्थान प्रदान किया जाएगा।
सरकार ने क्यों दिया था नोटिस?
22 मई को आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत भूमि और विकास कार्यालय ने जिमखाना क्लब को 5 जून तक अपनी प्रॉपर्टी सौंपने का निर्देश दिया। इस आदेश का आधार मूल लीज एग्रीमेंट का क्लॉज 4 है, जिसमें सरकार को ‘सार्वजनिक उद्देश्य’ के लिए जमीन वापस लेने का अधिकार प्राप्त है।
सरकार का तर्क है कि यह जमीन रक्षा, सुरक्षा और शासन से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जरूरी है। इस जमीन पर मौजूद सभी संरचनाएं, इमारतें, लॉन और फिक्स्चर भी सरकार के अधीन आ जाएंगी।
क्लब का कहना है कि सरकार ने इन कारणों को अस्पष्ट बताया है और इस कदम को ‘दिखावा’ करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई में जमीन, प्रीमियम या इमारतों का कोई मुआवजा नहीं दिया गया है।
क्लब ने यह भी दावा किया कि यह कदम संविधान के अनुच्छेद 300A का उल्लंघन है और 2009 में सरकार ने उनके मालिकाना हक को मान्यता दी थी। साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई उनके नियंत्रण और प्रबंधन पर कब्जा पाने की एक बड़ी कोशिश है, जिसमें सरकार सही कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन कर रही है।
यह विवाद 1913 में ब्रिटिश शासन के दौरान स्थापित ‘इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब’ से जुड़ा है, जिसका नाम 1947 में बदल दिया गया था। इसकी अधिकांश इमारतें 1930 के दशक में बनी थीं।











