दिल्ली में तिरंगा यात्रा से पहले पुलिस का कदम
दिल्ली में सीजेपी (सुप्रीम कोर्ट के समर्थन में नागरिक अधिकार संगठन) की तिरंगा यात्रा से पहले शुक्रवार दोपहर को दिल्ली पुलिस की टीम ने पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके के आवास पर पहुंचकर कार्रवाई की। यह घर एनसीपी-एससीपी (राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी – समाजवादी पार्टी) के प्रवक्ता अनीश गवांडे का है। पुलिस ने वहां से कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने साथ ले गए हैं। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि माहौल शांतिपूर्ण था, जहां दिपके कंधे पर तिरंगा लपेटे हुए बैठे थे और पुलिस अधिकारियों से बातचीत कर रहे थे।
आंदोलन और गिरफ्तारी का घटनाक्रम
इस पूरे प्रकरण को समझने के लिए जरूरी है कि पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और एसआईआर (सुप्रीम कोर्ट के समर्थन में नागरिक अधिकार संगठन) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था। इसी क्रम में सीजेपी के कार्यकर्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका जंतर-मंतर के पास पहुंचकर तिरंगा लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस ने इन दोनों को पहले हिरासत में लिया और बाद में गिरफ्तार कर लिया। वर्तमान में दोनों न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में हैं। इन गिरफ्तारियों के विरोध में दिपके ने आज शाम को सेंट्रल पार्क में तिरंगा यात्रा निकालने की घोषणा की थी।
दिपके का आरोप और पुलिस की कार्रवाई
इससे पहले दिपके ने दावा किया था कि बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियां उनका पीछा कर रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के कर्मचारी उनके घर की निगरानी कर रहे हैं। उन्हें आशंका थी कि दिल्ली पुलिस आज सुबह ही उन्हें हिरासत में ले सकती है। हालांकि वीडियो में दोनों के बीच बातचीत का माहौल शांतिपूर्ण दिख रहा है।
दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 29 का महत्व
दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 29 के अनुसार, पुलिस कमिश्नर और इंस्पेक्टर रैंक से नीचे के अधिकारी सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौखिक या लिखित निर्देश दे सकते हैं। ये निर्देश कानून के दायरे में होने चाहिए। पुलिस जुलूस और सभाओं के दौरान लोगों के व्यवहार को नियंत्रित कर सकती है, साथ ही जुलूस का मार्ग और समय तय कर सकती है। इसके अलावा, सड़कों, धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाली जगहों पर रुकावटें रोकने का भी अधिकार है। संगीत, ढोल और लाउडस्पीकर के प्रयोग पर भी नियंत्रण किया जा सकता है। इसलिए प्रदर्शन के दौरान रास्ता तय करना, भीड़ संभालना और अवरोध रोकना इस धारा के अंतर्गत आता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि पुलिस बिना शर्त किसी भी प्रदर्शन पर रोक लगा सकती है या जंतर-मंतर को स्थायी प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा सकती है। इन कदमों की वैधता संबंधित आदेश, कानून और अदालत के निर्देशों पर निर्भर करेगी।








