कर्पूरी ग्राम स्टेशन पर बिहार संपर्क क्रांति का ठहराव शुरू
समस्तीपुर के कर्पूरी ग्राम रेलवे स्टेशन पर अब दरभंगा (Darbhanga) से नई दिल्ली (New Delhi) जाने वाली बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस (Bihar Sampark Kranti Express) का ठहराव शुरू हो गया है। इस ऐतिहासिक स्टेशन पर ट्रेन को दो मिनट का विशिष्ट रुकाव दिया गया है, जिससे स्थानीय यात्रियों को दिल्ली और दरभंगा के बीच यात्रा में आसानी होगी।
स्थानीय नेताओं और रेलवे अधिकारियों ने किया उद्घाटन
बुधवार को केंद्रीय कृषि मंत्री रामनाथ ठाकुर (Ram Nath Thakur), सांसद शाम्भवी, एमएलसी तरुण चौधरी और विधायक अश्वमेध देवी ने कर्पूरी ग्राम स्टेशन पर आयोजित समारोह में बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर ने यात्रियों से बातचीत भी की और उनके अनुभव जानने का प्रयास किया। रेलवे के अनुसार, ट्रेन संख्या 12565 दरभंगा से नई दिल्ली जाने वाली बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस 19 अगस्त 2026 से कर्पूरी ग्राम स्टेशन पर दो मिनट के लिए रुकेगी। यह ट्रेन सुबह 9:41 बजे यहां पहुंचेगी और 9:43 बजे अपने मार्ग पर आगे बढ़ेगी। वहीं, दूसरी ओर, ट्रेन संख्या 12566 नई दिल्ली से दरभंगा जाने वाली बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस का ठहराव 20 अगस्त 2026 से शुरू होगा। यह ट्रेन सुबह 7:33 बजे कर्पूरी ग्राम स्टेशन पर पहुंचेगी और 7:35 बजे प्रस्थान करेगी।
कर्पूरी ठाकुर का योगदान और स्टेशन का विकास
कर्पूरी ठाकुर बिहार के प्रमुख समाजवादी नेता और स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी थे। उनका जन्म 24 जनवरी 1924 को समस्तीपुर जिले के पितौंझिया गांव में हुआ था, जिसे अब कर्पूरी ग्राम के नाम से जाना जाता है। वे अपनी सादगी, ईमानदारी और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए प्रसिद्ध थे। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा। आजादी के बाद उन्होंने समाजवादी राजनीति के माध्यम से गरीबों, किसानों, मजदूरों और वंचित वर्गों के हितों को प्रमुखता दी।
कर्पूरी ठाकुर दो बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे- पहली बार 1977 से 1979 तक और दूसरी बार 1980 के दशक में। अपने कार्यकाल में उन्होंने पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण लागू करने के महत्वपूर्ण कदम उठाए। उनकी नीतियों को बाद में ‘कर्पूरी ठाकुर फॉर्मूला’ के नाम से जाना गया। उनका निधन 17 फरवरी 1988 को हुआ। उनके सामाजिक और राजनीतिक योगदान को सम्मानित करने के लिए भारत सरकार ने 2024 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया।











