मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा
मध्य प्रदेश में लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक चौंकाने वाला मामला उजागर किया है। इंदौर और देवास जिलों में स्थित पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज (PTC) में तैनात एक हेड कांस्टेबल फिरोज खान के ठिकानों पर छापेमारी की गई। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इस 24 वर्षों की सेवा के दौरान, जिसने कुल 75 लाख रुपये वेतन प्राप्त किया, उसके पास लगभग 35.46 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति का जाल फैला हुआ है।
अवैध संपत्ति और जांच का विवरण
पुलिस उपाधीक्षक (DSP) सुनील तालान ने बताया कि आरोपी हेड कांस्टेबल फिरोज खान काफी समय से अपनी ड्यूटी से गैरहाजिर था। लोकायुक्त को शिकायत मिली थी कि उसने अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग कर विवादित संपत्तियों को खरीदने और बेचने का अवैध कारोबार शुरू कर रखा है। प्रारंभिक जांच में मिले मजबूत सबूतों के आधार पर, लोकायुक्त ने फिरोज खान और उसकी करीबी सहयोगी रोशनी वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है।
संपत्तियों का खुलासा और फर्जी कंपनियों का जाल
अब तक की जांच में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, फिरोज खान, उसके परिवार के सदस्यों, सहयोगियों और निजी कंपनियों के नाम पर कुल 38 अचल संपत्तियां मिली हैं, जिनमें घर, कृषि भूमि, आवासीय प्लॉट शामिल हैं। सरकारी मूल्यांकन के अनुसार इन संपत्तियों की कीमत लगभग 12.97 करोड़ रुपये है, जबकि बाजार में इनकी अनुमानित कीमत 35.46 करोड़ रुपये आंकी गई है।
फिरोज खान की कुल वेतन आय लगभग 75 लाख रुपये है, और यदि अन्य स्रोतों की आय भी जोड़ दी जाए, तो उसकी वैध आय 1.94 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके बावजूद, उसकी संपत्ति करोड़ों में है। जांच में 9 गाड़ियां, 21 बैंक खाते और उसकी महिला साझेदार रोशनी वर्मा के नाम पर 21.75 बीघा कृषि भूमि का रजिस्ट्रेशन भी पाया गया है। बैंक खातों से राशि निकालने पर रोक लगा दी गई है।
इसके अलावा, लोकायुक्त की जांच में यह भी पता चला है कि फिरोज खान ने काले धन को सफेद करने और कारोबार के लिए कई फर्जी व संदिग्ध कंपनियों का जाल बुना है। इनमें साहिल ट्रेडिंग कंपनी, रॉयल ग्रीन रियल एस्टेट, रोशनी सेल्स एंड सर्विस, महाराजा रियल एस्टेट और ब्लैक हॉरनेट जैसी कंपनियां शामिल हैं। फिलहाल, इंदौर और देवास के विभिन्न ठिकानों पर दस्तावेजों की जांच जारी है और कानूनी कार्रवाई तेजी से की जा रही है।









