बिहार के स्कूल में डीएम का अनूठा निरीक्षण अनुभव
जब भी जिले के डीएम (District Magistrate) किसी स्कूल का दौरा करते हैं, तो आमतौर पर बच्चों और शिक्षकों में हलचल मच जाती है। बच्चे रजिस्टर संभालने लगते हैं, शिक्षक कक्षा की व्यवस्था में जुट जाते हैं, और हर कोई यह जानने को उत्सुक रहता है कि अधिकारी आज क्या देखेंगे। लेकिन बिहार के कटिहार जिले के एक स्कूल में डीएम का दौरा सामान्य से अलग था।
स्कूल निरीक्षण के दौरान बच्चों को सीखने का अनूठा तरीका
कटिहार के रौतारा मिडिल स्कूल में जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी जब निरीक्षण के लिए पहुंचे, तो उन्होंने न केवल स्कूल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया, बल्कि बच्चों के साथ मिलकर पढ़ाई भी की। उन्होंने दसवीं कक्षा में जाकर छात्रों से बातचीत की, और विषय फिजिक्स के ‘ह्यूमन आई’ यानी मानव आंख पर सवाल पूछे। इस दौरान उन्होंने बच्चों को ब्लैकबोर्ड पर चित्र बनाने और जवाब देने का मौका भी दिया।
बच्चों को आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाने का अनूठा तरीका
निरीक्षण के समय आशुतोष द्विवेदी ने देखा कि करीब 80 प्रतिशत बच्चे अपने जवाब दे रहे थे, जबकि 20 प्रतिशत के लिए उन्होंने अतिरिक्त कक्षाओं का निर्देश दिया। इस कदम का मकसद उन बच्चों पर विशेष ध्यान देना था, जो किसी विषय को समझने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। जब कक्षा का समय समाप्त हुआ, तो उन्होंने बच्चों के बीच बैठकर खाना खाया और फिर अपनी थाली खुद धो दी। यह कदम बच्चों को आत्मनिर्भरता का संदेश देने के साथ-साथ उन्हें छोटे-छोटे कामों में भी भागीदारी का महत्व समझाने का प्रयास था।











