उज्जैन में पितृ अमावस्या पर सनातन संस्कृति का अनूठा प्रदर्शन
मध्य प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक राजधानी उज्जैन में शनिवार को पितृ अमावस्या के पावन अवसर पर एक अद्भुत धार्मिक आयोजन देखने को मिला। सुप्रीम कोर्ट की प्रसिद्ध वकील नाजिया इलाही खान ने इस दिन अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए मां शिप्रा के रामघाट पर विधि-विधान से तर्पण, पिंडदान और जलदान किया। यह आयोजन पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न हुआ, जिसने वहां मौजूद श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
पूर्वजों की मोक्ष और क्षमायाचना के लिए किया तर्पण
मीडिया से बातचीत में नाजिया इलाही ने बताया कि उन्होंने अपने पूर्वजों की मोक्ष की कामना के साथ-साथ बकरीद के दौरान दी गई जानवरों की कुर्बानी के लिए भी प्रायश्चित किया है। उन्होंने इस धार्मिक अनुष्ठान को अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और सुंदर निर्णय बताया। उज्जैन के रामघाट पर तीर्थ पुरोहितों की उपस्थिति में पूरे रीति-रिवाज से पूजा करने के बाद उनका मन पूरी तरह से हल्का हो गया।
धार्मिक परंपराओं और सामाजिक विचारधारा पर अपनी राय व्यक्त की
तर्पण के बाद मीडिया से बातचीत में नाजिया इलाही ने कहा कि यह निर्णय उनके जीवन का सबसे खास और खूबसूरत पल है। उन्होंने कहा, “मैंने अपने जीवन में कई बड़े फैसले लिए हैं, लेकिन पितृ अमावस्या पर उज्जैन आकर शिप्रा के तट पर पूर्वजों का तर्पण करना सबसे महत्वपूर्ण है।” उन्होंने अपने पूर्वजों के मोक्ष के साथ-साथ कुर्बानी के लिए क्षमा याचना भी की। साथ ही, उन्होंने अन्य धर्मों की परंपराओं पर भी तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा कि मुग़लकाल में औरंगजेब ने अपने पिता को पानी के लिए तरसाया और अपने भाई का गला काटा, ऐसे इतिहास से हमें सीखना चाहिए। सोशल मीडिया पर ट्रोल करने वालों को करारा जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वे एक लोकतांत्रिक देश में रहती हैं, जहां कानून और संविधान उन्हें यह करने की अनुमति देते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जल्द ही उनके धर्म परिवर्तन से जुड़ी खबरें भी सामने आएंगी।











