बिहार की राजनीति में बाहुबली और अपराधियों का प्रभाव
बिहार की राजनीतिक परिदृश्य में बाहुबली और माफिया का गहरा वजूद रहा है। यदि हम 80-90 के दशक की बात करें, तो इन दोनों के मुकाबले में चुनावी मैदान में खून-खराबा और हिंसा का बोलबाला था। इन बाहुबली नेताओं का इतिहास इतना खौफनाक रहा है कि जहां भी ये सक्रिय रहे, वहां खून-खराबा और डर का माहौल बन जाता था। खासकर मोकामा विधानसभा सीट, जो इन बाहुबली नेताओं के कारण सबसे अधिक चर्चा में रही है, इस बार भी हॉट सीट बनी हुई है।
बिहार के बाहुबली नेताओं का राजनीतिक सफर और अपराध
बिहार में बाहुबली नेताओं का राजनीतिक सफर अपराध और दबदबे के साथ जुड़ा रहा है। अनंत सिंह जैसे नेता ने 90 के दशक में गुंडई के बल पर राजनीति में कदम रखा और विधायक बन गए। इन नेताओं का नाम अक्सर हत्या, लूट और धमकी जैसे अपराधों से जुड़ा रहा है। अनंत सिंह का नाम तो खासतौर पर चर्चा में रहा है, जिन्होंने अपने खतरनाक क्राइम रिकॉर्ड के कारण पूरे बिहार में खौफ का माहौल बना दिया।
इसी तरह सूरजभान का नाम भी बिहार के कुख्यात बाहुबली नेताओं में शुमार है। उनका भी नाम कई अपराधों में सामने आया है। इन दोनों नेताओं की दुश्मनी 90 के दशक से चली आ रही है, और इनकी लड़ाई का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ा है। इन नेताओं ने अपने परिवार को भी राजनीतिक विरासत सौंप दी है, जिसमें उनके बच्चे और पत्नियां भी चुनावी मैदान में उतर चुके हैं।
बिहार में अपराध और राजनीति का गठजोड़
बिहार में अपराध और राजनीति का गठजोड़ इतना मजबूत हो चुका है कि अपराधियों को नेता बनाना और चुनाव जीताना आम बात हो गई है। कई बाहुबली नेताओं की मिल्कियत करोड़ों में है, और उनके परिवार वाले भी राजनीति में सक्रिय हैं। इस बार भी कई बाहुबली नेताओं की संतानें और पत्नियां चुनावी मैदान में हैं। उदाहरण के तौर पर अनंत सिंह के जुड़वां बेटे अभिषेक और अंकित सिंह, जो दिल्ली में पढ़ाई कर चुके हैं, अब राजनीति में कदम रख सकते हैं।
साथ ही, शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब भी पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला सिवान की राजनीति में बड़ा दिलचस्प माना जा रहा है। इन बाहुबली नेताओं की विरासत और उनके परिवार की राजनीतिक भागीदारी बिहार की चुनावी राजनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है।










