बिहार में शराबबंदी के बावजूद नशे की प्रवृत्ति जारी
2016 में बिहार में लागू हुई शराबबंदी के बावजूद, राज्य में शराब की खपत पूरी तरह से नहीं रुकी है। एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023-24 में बिहार के 15 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 16.5 प्रतिशत पुरुषों ने अपनी शराब पीने की आदत को स्वीकार किया है। यह आंकड़ा पिछले सर्वेक्षण से अधिक है, जो दर्शाता है कि प्रतिबंध के बावजूद नशे की प्रवृत्ति कम नहीं हुई है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) भारत सरकार का सबसे बड़ा स्वास्थ्य सर्वे है, जिसकी छठी रिपोर्ट 2023-24 में प्रकाशित हुई है। इसमें बिहार के बारे में एक महत्वपूर्ण और चौंकाने वाला तथ्य उजागर हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, 15 वर्ष से ऊपर के लगभग 16.5 प्रतिशत पुरुषों ने माना कि वे शराब का सेवन करते हैं। यह आंकड़ा 2019-21 में हुए NFHS-5 के 15.4 प्रतिशत से अधिक है, जिससे पता चलता है कि शराबबंदी के बावजूद शराब पीने वालों की संख्या में वृद्धि हुई है। केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि 0.4 प्रतिशत महिलाएं भी शराब का सेवन कर रही हैं।
गांव और शहर में नशे की प्रवृत्ति में बड़ा फर्क
NFHS-6 की रिपोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि ग्रामीण और शहरी इलाकों में नशे की प्रवृत्ति में बड़ा फर्क है। ग्रामीण बिहार में लगभग 17.1 प्रतिशत पुरुष शराब पीते हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा केवल 12.8 प्रतिशत है। ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब आसानी से उपलब्ध हो जाती है और पुलिस की नजर कम रहती है, इसलिए वहां पर शराबबंदी का प्रभाव कम दिखाई देता है।
शराब की अनुपस्थिति में नशे का विकल्प खोजा गया
जब शराब पर प्रतिबंध लगा, तो नशे की लत से जूझ रहे लोग सस्ते और आसानी से मिलने वाले अन्य नशों की ओर आकर्षित हुए। पटना के इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (IGIMS) के डॉक्टरों ने इस बात की पुष्टि की है कि प्रतिबंध के बाद से नशीली दवाओं, नींद की गोलियों और अन्य फार्मास्यूटिकल दवाओं का दुरुपयोग बढ़ गया है। हाल ही में पुलिस ने कोडीन युक्त कफ सीरप के बड़े जखीरे भी पकड़े हैं, जिसमें अधिक मात्रा में सेवन करने पर नशा हो सकता है।
नशीली दवाओं के मामलों में भारी बढ़ोतरी
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, NDPS (नशीली दवाओं और मन:प्रभावी पदार्थों का अधिनियम) के तहत दर्ज मामलों की संख्या 2020 में 964 थी, जो 2024 में बढ़कर 2,411 हो गई है। यह आंकड़ा चार वर्षों में लगभग 150 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। यह संकेत करता है कि नशे की प्रवृत्ति और अपराध दोनों ही बढ़ रहे हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या सिर्फ प्रतिबंध ही नशे की समस्या का समाधान है या इसके लिए और भी कदम उठाने जरूरी हैं।










