दिल्ली में छात्रावास सुरक्षा के लिए नई पहल
दिल्ली सरकार ने छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाया है। अब शहर में मौजूद पीजी (PG) इमारतों का संरचनात्मक ऑडिट कराया जाएगा, ताकि यह जांचा जा सके कि ये भवन छात्रों के रहने के लिए सुरक्षित हैं या नहीं। इस कदम का मकसद इन आवासीय इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक मूल्यांकन करना है। साथ ही, पीजी नियमों की समीक्षा कर सुरक्षा मानकों को मजबूत बनाने पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
समीक्षा बैठक में सुरक्षा और व्यवस्था पर चर्चा
इस संदर्भ में दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की अध्यक्षता में एक संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित हुई, जिसमें मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस बैठक में भवन सुरक्षा, छात्रावास व्यवस्था और पीजी नियमों पर विस्तार से चर्चा हुई। शहरी विकास मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन भी किया गया है, जो दिल्ली में चल रहे पीजी नियमों की समीक्षा करेगी और बेहतर रहने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
खाली मकानों का उपयोग और सुरक्षा उपायों पर विचार
बैठक में खाली पड़े दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के मकानों को छात्रावास के रूप में इस्तेमाल करने का प्रस्ताव भी चर्चा का हिस्सा रहा। सरकार का मानना है कि यदि इन खाली मकानों का सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो छात्रों को सुरक्षित और आरामदायक आवास मिल सकता है। समिति इन विकल्पों की भी जांच करेगी, जिसमें उपलब्ध मकानों और आवश्यक सुविधाओं का आकलन शामिल है। इसके साथ ही, पहले से मौजूद पीजी भवनों का भी संरचनात्मक ऑडिट कराया जाएगा, ताकि उनकी मजबूती और सुरक्षा का परीक्षण किया जा सके। इस प्रक्रिया का उद्देश्य छात्रों को किसी भी तरह के खतरे से बचाना है, जिसमें आग से सुरक्षा और अन्य जरूरी सुरक्षा उपाय भी शामिल हैं।










