दिल्ली की कोर्ट ने ताहिर हुसैन को उम्रकैद की सजा सुनाई
दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दिल्ली दंगों के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई। यह फैसला उस समय आया है जब उन्हें 2020 में IB (Intelligence Bureau) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या का दोषी माना गया था। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में फांसी की सजा नहीं दी जा सकती, क्योंकि अभियोजन पक्ष कोई ठोस सबूत प्रस्तुत करने में असमर्थ रहा।
कोर्ट का निर्णय और दोषियों की सजा का आधार
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि कानून के अनुसार मौत की सजा तभी दी जा सकती है जब यह साबित हो कि दोषियों में सुधार की कोई संभावना नहीं है और उनका जीवित रहना समाज के लिए खतरा बन सकता है। जज प्रवीण सिंह ने यह भी कहा कि पुलिस ने ऐसा कोई मजबूत साक्ष्य नहीं पेश किया, जिससे यह साबित हो सके कि दोषियों का स्वभाव जन्मजात हिंसक है या वे पहले भी जघन्य अपराधों में शामिल रहे हैं। केवल अपराध की गंभीरता ही फांसी की सजा का आधार नहीं हो सकती, बल्कि यह भी जरूरी है कि दोषी पूरी तरह सुधार से बाहर हो।
सजा पाने वाले दोषी और अदालत का विश्लेषण
ताहिर हुसैन के अलावा नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इन सभी को आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के तहत आजीवन कारावास की सजा मिली है। इसके साथ ही ताहिर पर 5 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने यह भी माना कि दोषियों का जेल में व्यवहार सामान्य रहा है, और जमानत मिलने के बाद उनके खिलाफ कोई नई आपराधिक गतिविधि नहीं हुई। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि इन दोषियों की शैक्षणिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे आसानी से भड़क सकते थे, जिसे एक राहत के रूप में देखा गया।











