गया जिले में बोरवेल हादसे की भयावह कहानी
गया (Gaya) जिले के फतेहपुर प्रखंड के गुरपा थाना क्षेत्र के रंगु नगर गांव में तीन वर्षीय बच्चे पीयूष कुमार (Piyush Kumar) खेलते-खेलते अचानक एक खुले बोरवेल में गिर गया। यह बोरवेल खेत के किनारे स्थित था, और बच्चे का मोबाइल खेलते-खेलते ही वह नीचे चला गया। पीयूष की मां खेत में पाइप बिछाने के काम में लगी थीं, जब उन्हें बच्चे की आवाज सुनाई दी। शुरुआत में लगा कि आवाज पास ही कहीं से आ रही है, लेकिन कुछ ही सेकंड में पता चला कि यह आवाज जमीन के नीचे से आ रही है। इस खबर ने पूरे गांव में हड़कंप मचा दिया।
बोरवेल में फंसे बच्चे का रेस्क्यू ऑपरेशन
मौके पर पहुंची पुलिस, प्रशासन और NDRF (National Disaster Response Force) की टीम ने तुरंत ही राहत कार्य शुरू किया। सबसे पहले बच्चे तक ऑक्सीजन पहुंचाने का प्रयास किया गया, जिसके लिए बोरवेल में पाइप डालकर लगातार ऑक्सीजन दी जा रही थी। मुख्य चुनौती थी बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालना। पटना से बुलाए गए NDRF जवानों ने करीब चार घंटे तक सावधानीपूर्वक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। हर कदम पर सूझबूझ और सावधानी बरती गई, ताकि बच्चे की जान को खतरा न हो। अंततः, जवानों ने बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
बच्चे का स्वास्थ्य और गांव में खुशी का माहौल
जैसे ही पीयूष बाहर आया, पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों ने तालियां बजाईं और राहत की सांस ली। बच्चे को तुरंत पानी पिलाया गया और उसे फतेहपुर स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी जांच की। डॉक्टरों के अनुसार, बच्चा पूरी तरह सुरक्षित है और उसकी निगरानी में रखा गया है। उसकी स्थिति स्थिर है और आवश्यक परीक्षण के बाद उसे घर भेजा जाएगा। पीयूष की मां ने बताया कि उन्हें पता नहीं था कि उनका बेटा कब बोरवेल के पास चला गया। वह पाइप बिछाने का काम कर रही थीं, तभी बच्चे की आवाज सुनकर पता चला कि वह गिर गया है।
यह घटना उन खुले बोरवेलों की गंभीरता को उजागर करती है, जिन्हें काम खत्म होने के बाद भी खुला छोड़ दिया जाता है। हर साल देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन लापरवाही अभी भी जारी है। यह हादसा एक बार फिर से सावधानी और सतर्कता की आवश्यकता को रेखांकित करता है।











