मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महेश्वर दंपति को दी राहत
मध्य प्रदेश के हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने सोमवार को एक ऐसे दंपति को राहत प्रदान की है, जो प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान चर्चा में आए थे। अदालत ने आदेश दिया है कि अगली सुनवाई तक उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों में कोई कठोर या जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।
अंतरिम आदेश और याचिका का आधार
जस्टिस गजेंद्र सिंह की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया। अदालत ने कहा कि खरगोन जिले के महेश्वर थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया जाए, जब तक कि अगली सुनवाई न हो। दंपति ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर महेश्वर नगर परिषद द्वारा युवती का जन्म प्रमाण पत्र रद्द किए जाने को चुनौती दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अंतरधार्मिक विवाह के बाद बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए उनके जन्म प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद, बदले हुए रिकॉर्ड के आधार पर उनके पति के खिलाफ महेश्वर थाने में एफआईआर दर्ज कर दी गई।
मामले का विस्तृत संदर्भ और आरोप
एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के साथ-साथ बाल विवाह प्रतिबंध अधिनियम और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं। इससे पहले पॉक्सो मामलों की विशेष अदालत ने आरोपी पति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। दंपति ने अब हाईकोर्ट का रुख किया है। याचिका में युवती को नाबालिग बताया गया है और आरोप लगाया गया है कि विवाह के समय उसकी जन्म तिथि को गलत दिखाने के लिए उसके रिकॉर्ड में साजिश के तहत छेड़छाड़ की गई।
याचिका के अनुसार, युवती का वास्तविक जन्म 1 जनवरी 2008 को हुआ था, जो कि महेश्वर नगर परिषद, आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों में भी दर्ज है। बावजूद इसके, उसके परिवार ने इस रिश्ते का विरोध किया और बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए उसका जन्म प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया। दंपति ने यह भी आरोप लगाया कि उनके अंतरधार्मिक विवाह को “लव जिहाद” से जोड़कर सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास किया गया, जिससे उनकी सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है।
हाईकोर्ट ने फिलहाल दंपति को अंतरिम राहत दी है और राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान किया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी, जहां अदालत आगे की कार्रवाई का निर्णय लेगी।











