दतिया उपचुनाव का राजनीतिक माहौल और चुनावी समीकरण
सोमवार को दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए नामांकन का अंतिम दिन था, जिसमें बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों के उम्मीदवारों ने अपने पर्चे दाखिल किए। इस दिन शहर में राजनीतिक दिग्गजों का जमावड़ा देखने को मिला, इसलिए मैंने दतिया जाकर स्थानीय राजनीतिक स्थिति का जायजा लेने का निर्णय लिया।
यह चुनाव केवल नामांकन का अवसर नहीं था, बल्कि इसने पूरे मध्य प्रदेश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद उनके समर्थकों में गहरा आक्रोश फैल चुका था। पार्टी के अंदर नाराजगी की खबरें चरम पर थीं। सवाल यह था कि क्या दतिया का राजनीतिक तापमान अभी भी उतना ही गर्म है या नहीं? इन ज्वलंत सवालों के जवाब खोजने के लिए मैं जमीन पर उतर पड़ा।
आस्था और राजनीति का अनोखा मेल
दतिया की सुबह सामान्य शहरों जैसी नहीं होती। यहाँ दिन की शुरुआत आस्था के केंद्र मंदिरों से होती है। विधानसभा उपचुनाव को लेकर दोनों दलों ने अपनी शक्ति दिखाने की पूरी तैयारी कर रखी थी, लेकिन मैंने चुनावी दिन की शुरुआत धार्मिक स्थल पीतांबरा पीठ के दर्शन से करने का फैसला किया।
मंदिर पहुंचते ही श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच चुनावी हलचल भी साफ नजर आ रही थी। तभी मुझे कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह मिल गए, जो भी नामांकन से पहले मां का आशीर्वाद लेने आए थे। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से कांग्रेस को लाभ हुआ है, क्योंकि उनके समर्थकों में निराशा है, जो कांग्रेस के पक्ष में जा सकती है।
मंदिर से निकलते ही खबर मिली कि बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी होटल में अंतिम तैयारियों में जुटे हैं। हम तुरंत वहां पहुंचे, जहां आशुतोष ने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्होंने अपनी उम्मीदवारी को मां पीतांबरा की कृपा माना है। फिर सवाल आया कि क्या नरोत्तम मिश्रा नाराज हैं, तो उन्होंने इसे मीडिया की बनाई धारणा बताया और कहा कि वे रोज उनसे बातचीत कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री का दतिया दौरा और राजनीतिक संदेश
दोपहर करीब 12 बजे खबर आई कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हेलीकॉप्टर से दतिया के लिए रवाना हो चुके हैं। हम भी तुरंत दतिया एयरपोर्ट पहुंचे, जहां पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा भी हेलीकॉप्टर से उतर रहे थे। इस दृश्य ने राजनीतिक माहौल में नई ऊर्जा भर दी। दोनों नेताओं ने सबसे पहले आशुतोष तिवारी की पीठ थपथपाई और मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी पूरी तरह से एकजुट है।
हेलीकॉप्टर से उतरते ही नरोत्तम मिश्रा का साथ बीजेपी प्रत्याशी का हाथ थामे रहना और उन्हें छोटे भाई की तरह साथ लेकर चलना इस बात का संकेत था कि पार्टी में कोई मतभेद नहीं है।
नामांकन स्थल पर पहुंचकर बीजेपी उम्मीदवार का समर्थन करने के लिए मंच पर बड़े नेताओं की मौजूदगी में भाषण हुए। नरोत्तम मिश्रा का भाषण इस बार भी भावुक हो गया, जब उनकी आवाज भर्रा गई और आंखें नम हो गईं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से जोर देकर कहा कि यह चुनाव बीजेपी का है और सभी को पूरी ताकत से जुटना चाहिए। उनके गले का रुंधना और आंखों का भर आना इस दिन की सबसे भावुक तस्वीर बन गई।









