बिहार के नालंदा जिले में सरकारी योजनाओं का जमीनी सच सामने आया
बिहार के नालंदा जिले में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने सरकारी योजनाओं की हकीकत को उजागर कर दिया। जिले में योजनाओं की प्रगति का आकलन करने और आम जनता की समस्याएं सुनने के लिए पहुंचे जिलाधिकारी उदिता सिंह की गाड़ी खुद कीचड़ में फंस गई। कई प्रयासों के बावजूद जब वाहन बाहर नहीं निकला, तो ग्रामीणों और सुरक्षाकर्मियों ने मिलकर उसे धकेलने का प्रयास किया। अंततः कठिन मेहनत के बाद गाड़ी कीचड़ से बाहर निकाली जा सकी।
सड़क की खराब स्थिति ने प्रशासन को किया परेशान
नालंदा की जिलाधिकारी उदिता सिंह और पुलिस अधीक्षक भरत सोनी सरकारी योजनाओं की समीक्षा और जनता की शिकायतें सुनने के लिए बराड़ा गांव पहुंचे थे। यहां प्रशासन की ओर से एक सहयोग शिविर का आयोजन किया गया था, जिसमें अधिकारियों ने सीधे लोगों से संवाद किया और योजनाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम समाप्त होने के तुरंत बाद, भारी बारिश के कारण सड़क पूरी तरह कीचड़ में बदल गई। जैसे ही डीएम की गाड़ी आगे बढ़ी, वह फंस गई और पहिए घूमने लगे, लेकिन वाहन आगे नहीं बढ़ पाया। चालक ने कई प्रयास किए, लेकिन सड़क की खराब हालत के कारण वाहन पूरी तरह फंस गया।
ग्रामीणों और सुरक्षाकर्मियों का मिलकर प्रयास
मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों और ग्रामीणों ने मिलकर गाड़ी को धकेलने का प्रयास किया। कई कोशिशों के बाद, वाहन को कीचड़ से बाहर निकाला गया और काफिला अपने मार्ग पर आगे बढ़ सका। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें दिखाया गया है कि बारिश के कारण सड़क पर काफी कीचड़ है और लोग मिलकर वाहन को बाहर निकालने का प्रयास कर रहे हैं। इस घटना पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान अभी तक नहीं आया है, लेकिन यह वीडियो तेजी से साझा किया जा रहा है।
सामाजिक मीडिया पर ग्रामीणों की मदद की प्रशंसा
सरकारी योजनाओं का निरीक्षण करने निकले जिलाधिकारी को उसी दौरान सड़क की वास्तविक स्थिति का सामना करना पड़ा। जिस रास्ते पर आम लोग रोज चलने को मजबूर हैं, उसी रास्ते पर प्रशासनिक काफिला फंस गया। इस घटना के दौरान स्थानीय लोगों ने बिना हिचकिचाहट के प्रशासन की मदद की। ग्रामीणों ने सुरक्षाकर्मियों के साथ मिलकर वाहन को बाहर निकालने में सहयोग किया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे ग्रामीणों ने मिलकर कठिन परिस्थिति में प्रशासन का साथ दिया। कई लोग इस मदद की सराहना कर रहे हैं, जबकि कुछ इसे ग्रामीण सड़क व्यवस्था की बदहाली से जोड़कर देख रहे हैं।










